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मोदी का सपना नहीं हुआ पूरा, आखिर क्यों?

Wed, 28 May 2014 05:27 PM IST
Updated Wed, 28 May 2014 05:27 PM IST
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modi's dream not complete why?

बेहतर समन्वय के लिए मिलते-जुलते मंत्रालय को एक साथ लाने की मुहिम मोदी सरकार में पूरी तरह परवान नहीं चढ़ पाई है।

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मंत्रालयों के एकीकरण के तमाम दावों के बावजूद कृषि एवं उर्वरक, खाद्य एवं खाद्य प्रसंस्करण, छोटे एवं बड़े उद्योग, समाज कल्याण और महिला व बाल विकास के लिए अलग-अलग मंत्रालय और मंत्री बनाए गए हैं।

ट्रांसपोर्ट से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों के लिए रेल, नागर विमानन, सड़क परिवहन और शिपिंग से जुड़े कुल चार मंत्रालय हैं। इनमें से सड़क परिवहन और शिपिंग को एक साथ रखा गया है।
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शपथ ग्रहण के बाद मोदी ने दिए थे संकेत

modi's dream not complete why?

शपथ ग्रहण करने से पहले नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर एक जैसे क्षेत्रों से जुड़े मंत्रालयों के एकीकरण और ऐसे मंत्रालयों के समूह का जिम्मा एक मंत्री को दिए जाने के संकेत दिए थे।

लेकिन मंगलवार को मोदी सरकार के मंत्रियों और उनके मंत्रालयों की जो सूची सामने आई है, वह अलग ही तस्वीर पेश करती है। मसलन, कृषि मंत्रालय का जिम्मा राधामोहन सिंह के पास है तो उर्वरक अभी भी रसायन के साथ एक अलग मंत्रालय है।

इसी तरह खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय की कमान रामविलास पासवान संभाल रहे हैं, जबकि खाद्य प्रसंस्करण हरसिमरत कौर के पास है। यूपीए सरकार में कृषि और खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय एक ही कैबिनेट मंत्री के पास थे।

कब होगा सपना पूरा?

modi's dream not complete why?

यूपीए सरकार में ग्रामीण विकास, पंचायती राज और पेयजल एक ही मंत्री के पास थे। मोदी सरकार में भी इन्हें एक साथ रखते हुए गोपीनाथ मुंडे को इनकी जिम्मेदारी दी गई है।

लेकिन पेयजल और जल संसाधन के लिए अलग-अलग मंत्रालय बरकरार रहेंगे। उद्योग से जुड़े भी तीन मंत्रालय मोदी सरकार में हैं।

वाणिज्य के साथ उद्योग मंत्रालय जुड़ा है, जबकि छोटे व मझोले और भारी उद्योगों के लिए अलग मंत्रालय हैं। सामाजिक विकास से नाता रखने वाले महिला एवं बाल विकास के अलावा आदिवासी मामलों, अल्पसंख्यक मामलों और सामाजिक न्याय के कुल चार मंत्रालय हैं।

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