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पवन ऊर्जा परियोजनाओं को तेजी देगी मोदी सरकार

Fri, 09 Jan 2015 08:56 AM IST
नई दिल्ली/ सुजय मेहदूदिया
नई दिल्ली/ सुजय मेहदूदिया Updated Fri, 09 Jan 2015 08:56 AM IST
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Modi Govt. to speed up wind energy projects

केंद्र सरकार अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में अब सौर ऊर्जा के अलावा अन्य विकल्पों को भी बढ़ावा देने के कदम बढ़ाने की तैयारी कर रही है। इसके तहत देख के अपतटीय क्षेत्रों में पवन ऊर्जा के उत्पादन के लिए पैकेज और वित्तीय प्रोत्साहन देने की योजना है। नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) ने इसके लिए फार्मूला तैयार करने का काम शुरू कर दिया है।

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जानकारी के मुताबिक इस मामले में गतिविधियां बड़ी तेजी से आगे बढ़ रही हैं। अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में निवेश के लिए ग्लोबल निवेशकों का एक सम्मेलन अगले माह होने जा रहा है। इधर मंत्रालय ने अक्षय ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय उपायों के साथ-साथ इस क्षेत्र की परियोजनाओं के लिए पैकेज देने का कैबिनेट नोट तैयार कर लिया है। इसे मंजूरी के लिए कैबिनेट में पेश किया जाएगा।
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पवन ऊर्जा परियोजनाओं के दिए जाने वाले वित्तीय प्रोत्साहनों में एक्सेलरेटेड डेप्रिसिएशन (एडी) संबंधी प्रावधान, दस वर्ष का कर अवकाश (टैक्स हॉलीडे), उपकरणों के लिए आयात शुल्क में छूट, विंड टर्बाइन और अन्य उपकरणों के उत्पादन पर उत्पाद शुल्क से मुक्ति और इस क्षेत्र से जुड़े विभिन्न प्रकार के अध्ययनों और सेवाओं पर शून्य सेवा कर जैसे उपायों पर विचार किया जा रहा है। इसके अलावा इन परियोजनाओं की स्थापना के लिए सर्वेक्षण पोत (सर्वे वैसल) और स्थापना पोत (स्टालेशन वैसल) उपलब्ध कराने की भी योजना है।
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इसके अलावा मोदी सरकार अक्षय ऊर्जा के उत्पादन की लागत घटाने के लिए अक्षय ऊर्जा के साथ-साथ पारंपरिक तरीकों से बिजली उत्पादन को मिलाकर उत्पादन करने (बंडलिंग) की छूट देने पर भी विचार कर रही है। इससे गैर पारंपरिक ऊर्जा की कीमतें घटने के साथ-साथ उसकी स्वीकार्यता भी बढ़ेगी।

हालांकि यह गैर आवंटित ब्लॉकों की उपलब्धता पर निर्भर करेगा। पवन ऊर्जा के उत्पादन को आगे बढ़ाने के लिए एमएनआरई अपतटीय पवन ऊर्जा ब्लॉकों का सर्वेक्षण भी शुरू करने जा रहा है। इसके तहत शुरुआती दौर में संसाधनों के आकलन के साथ-साथ समुद्री अध्ययन और समुद्र तल का सर्वेक्षण आदि शामिल हैं। ऐसे सर्वेक्षणों को जल्द शुरू करने का मंत्रालय की ओर से प्रस्ताव है।

इस काम को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए निजी फर्मों और विदेशी कंपनियों को परियोजनाओं की जरूरतों को देखते हुए (केस टू केस बेसिस) अध्ययन और सर्वेक्षण करने की अनुमति दी जा सकती है। हालांकि इस छूट के बावजूद अध्ययन के लिए सर्वेयर को जहां आवश्यक हो, वहां रक्षा मंत्रालय और पर्यावरण मंत्रालय से भी अलग से मंजूरी लेनी होगी। इसके अलावा इन मामलों में सर्वेक्षण के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले जहाजों और अन्य उपकरणों का रक्षा मंत्रालय द्वारा निरीक्षण भी किए जाने का प्रावधान भी लागू होगा।


इसके अलावा इन परियोजनाओं के लिए निविदाएं जारी करने से पहले गृह, विदेश और अंतरिक्ष मंत्रालय से भी सैद्धांतिक मंजूरी लेनी होगी। पवन ऊर्जा परियोजनाओं के लिए ब्लॉकों का चिह्नांकन करते वक्त अपतटीय क्षेत्रों में मौजूद खनिज, तेल व गैस के भंडार, जलीय जीवों और समुद्री बनावटों व पुरातत्वीय पहलुओं को भी ध्यान में रखा जाएगा। इन ब्लॉकों के आवंटन के लिए खुली अंतरराष्ट्रीय नीलामी (आईसीबी) की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

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