{"_id":"6f5f2a6a1a163a15281bdb78c6b5da0d","slug":"modi-govt-should-step-up-reforms-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सुधारों में तेजी लाए मोदी सरकार","category":{"title":"Business archives","title_hn":"बिज़नेस आर्काइव","slug":"business-archives"}}
सुधारों में तेजी लाए मोदी सरकार
फ्रैंक इस्लाम
Updated Mon, 29 Dec 2014 11:00 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
किसी सरकार के बारे में निर्णायक नतीजे पर पहुंचने के लिए सात माह का समय शायद पर्याप्त नहीं होगा, हालांकि इतने समय में विभिन्न क्षेत्रों में सरकार के शुरुआती प्रदर्शन का आकलन किया जा सकता है। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार के अब तक के प्रदर्शन को कितने नंबर दिए जाएं? एक भारतीय अमेरिकी के नजरिए से मै सरकार को दो क्षेत्रों अर्थव्यवस्था और विदेशी नीति में ज्यादा नंबर दूंगा।
यूपीए सरकार के बाद दिल्ली की सत्ता संभालने वाली कोई भी सरकार शायद बेहतर दिखती, क्योंकि यूपीए सरकार के सत्ता में आखिरी तीन वर्ष नीतिगत निष्क्रियता, खराब शासन और घोटालों को लेकर चार्चित रहे। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए चुनौतियां अलग थीं। वे न केवल बेहतर शासन के वादे के साथ सत्ता में आए हैं, बल्कि उन्होंने बड़े बदलाव और भारत को पुराना गौरव दिलाने का भी वादा किया है।
ऐसे में यह आवश्यक था कि वह पहले दिन से बेहतर प्रदर्शन करें। अब तक उन्होंने उम्मीदों का प्रबंधन करने, खास कर अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर बेहतर काम किया है। पिछले कुछ वर्षों से सुस्त रही भारतीय अर्थव्यवस्था एक बार फिर से पटरी पर लौटने के संकेत दे रही है। भारत से मुंह मोड़ चुके विदेशी निवेशक वापस लौट रहे हैं।
विज्ञापन
केंद्र सरकार ने महंगाई पर अंकुश लगाया है। सेंसेक्स मार्च में 22,000 पर था, जो पिछले माह 28,000 के स्तर पर पहुंच चुका है। गोल्डमैन सैक्स का अनुमान है कि भारतीय अर्थव्यवस्था अगले कुछ वर्षों में मजबूती से ग्रोथ दर्ज करेगी। इस वर्ष भारत की आर्थिक विकास दर 6 फीसदी,2015 में 6.3 फीसदी,2016 में 6.8 फीसदी और 2017 मेें 7 फीसदी रहेगी।
केंद्र सरकार किस्मत के मोर्चे पर अब तक भाग्यशाली रही है और तेल कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल से घटकर 60 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गईं हैं। अर्थव्यवस्था की चक्रीय प्रकृति को देखते हुए अर्थव्यवस्था में अब सकारात्मक बदलाव आना लाजिमी है।
अच्छे नेता भाग्य को अपने पक्ष में कर लेते हैं और ऐसा लगता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐसा करने में सफलता हासिल की है। विदेशी निवेशक भारत को दूसरा मौका देने को इसलिए तैयार हैं, क्योंकि नरेंद्र मोदी का गुजरात में ट्रैक रेकार्ड कारोबार को बढ़ावा देने वाले मुख्यमंत्री के तौर पर रहा है और चुनावी अभियान में उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर भी उद्योग को मजबूती से बढ़ावा देने की बात कही है।
अब केंद्र सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती आर्थिक सुधारों को जारी रखने की है। पिछले सप्ताह के घटनाक्रम से पता चलता है कि राज्यसभा में बहुमत के बिना केंद्र सरकार के लिए ऐसा करना आसान नहीं होगा।
वित्त मंत्री अरुण जेटली को अगले कुछ माह में दूसरा बजट पेश करना है। सुधारों के नजरिए से यह बजट अहम होगा। पिछले माह मुझे दिल्ली में ब्रुकिंग इंस्टीट्यूशन स्टडी टूर डेलीगेशन के सदस्य के तौर पर वित्त मंत्री से मिलने का मौका मिला। मई में वित्त मंत्री बनने के बाद अब तक कोई गलत कदम न उठाने वाले जेटली ने मुझे काफी प्रभावित किया। बैठक से निकलने के बाद मुझे लगा कि भारतीय अर्थव्यवस्था सही हाथों में हैं। मेरा मानना है कि जेटली का अगला बजट सुधारों की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगा।
दूसरा क्षेत्र विदेशी नीति है, जहां मोदी सरकार ने बहुत अच्छा काम किया है, खास तौर पर अमेरिका से रिश्ते सुधारने के मोर्चे पर। देवयानी खोबराडे प्रकरण और व्यापार व बौद्धि संपदा अधिकार के मुद्दे का समाधान न कर पाने के कारण दोनों देशों के बीच बड़े पैमाने पर अविश्वास पैदा हो गया था।
(लेखक एफआई इन्चेस्टमेंट्स के सीईओ हैं और उनकी वेबसाइट फ्रैंकइस्लामडॉटकॉम है)
विज्ञापन
यूपीए सरकार के बाद दिल्ली की सत्ता संभालने वाली कोई भी सरकार शायद बेहतर दिखती, क्योंकि यूपीए सरकार के सत्ता में आखिरी तीन वर्ष नीतिगत निष्क्रियता, खराब शासन और घोटालों को लेकर चार्चित रहे। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए चुनौतियां अलग थीं। वे न केवल बेहतर शासन के वादे के साथ सत्ता में आए हैं, बल्कि उन्होंने बड़े बदलाव और भारत को पुराना गौरव दिलाने का भी वादा किया है।
विज्ञापन
ऐसे में यह आवश्यक था कि वह पहले दिन से बेहतर प्रदर्शन करें। अब तक उन्होंने उम्मीदों का प्रबंधन करने, खास कर अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर बेहतर काम किया है। पिछले कुछ वर्षों से सुस्त रही भारतीय अर्थव्यवस्था एक बार फिर से पटरी पर लौटने के संकेत दे रही है। भारत से मुंह मोड़ चुके विदेशी निवेशक वापस लौट रहे हैं।
विज्ञापन
केंद्र सरकार ने महंगाई पर अंकुश लगाया है। सेंसेक्स मार्च में 22,000 पर था, जो पिछले माह 28,000 के स्तर पर पहुंच चुका है। गोल्डमैन सैक्स का अनुमान है कि भारतीय अर्थव्यवस्था अगले कुछ वर्षों में मजबूती से ग्रोथ दर्ज करेगी। इस वर्ष भारत की आर्थिक विकास दर 6 फीसदी,2015 में 6.3 फीसदी,2016 में 6.8 फीसदी और 2017 मेें 7 फीसदी रहेगी।
केंद्र सरकार किस्मत के मोर्चे पर अब तक भाग्यशाली रही है और तेल कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल से घटकर 60 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गईं हैं। अर्थव्यवस्था की चक्रीय प्रकृति को देखते हुए अर्थव्यवस्था में अब सकारात्मक बदलाव आना लाजिमी है।
अच्छे नेता भाग्य को अपने पक्ष में कर लेते हैं और ऐसा लगता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐसा करने में सफलता हासिल की है। विदेशी निवेशक भारत को दूसरा मौका देने को इसलिए तैयार हैं, क्योंकि नरेंद्र मोदी का गुजरात में ट्रैक रेकार्ड कारोबार को बढ़ावा देने वाले मुख्यमंत्री के तौर पर रहा है और चुनावी अभियान में उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर भी उद्योग को मजबूती से बढ़ावा देने की बात कही है।
अब केंद्र सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती आर्थिक सुधारों को जारी रखने की है। पिछले सप्ताह के घटनाक्रम से पता चलता है कि राज्यसभा में बहुमत के बिना केंद्र सरकार के लिए ऐसा करना आसान नहीं होगा।
वित्त मंत्री अरुण जेटली को अगले कुछ माह में दूसरा बजट पेश करना है। सुधारों के नजरिए से यह बजट अहम होगा। पिछले माह मुझे दिल्ली में ब्रुकिंग इंस्टीट्यूशन स्टडी टूर डेलीगेशन के सदस्य के तौर पर वित्त मंत्री से मिलने का मौका मिला। मई में वित्त मंत्री बनने के बाद अब तक कोई गलत कदम न उठाने वाले जेटली ने मुझे काफी प्रभावित किया। बैठक से निकलने के बाद मुझे लगा कि भारतीय अर्थव्यवस्था सही हाथों में हैं। मेरा मानना है कि जेटली का अगला बजट सुधारों की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगा।
दूसरा क्षेत्र विदेशी नीति है, जहां मोदी सरकार ने बहुत अच्छा काम किया है, खास तौर पर अमेरिका से रिश्ते सुधारने के मोर्चे पर। देवयानी खोबराडे प्रकरण और व्यापार व बौद्धि संपदा अधिकार के मुद्दे का समाधान न कर पाने के कारण दोनों देशों के बीच बड़े पैमाने पर अविश्वास पैदा हो गया था।
(लेखक एफआई इन्चेस्टमेंट्स के सीईओ हैं और उनकी वेबसाइट फ्रैंकइस्लामडॉटकॉम है)