मोदी करेंगे 'मिशन मंत्रालय' पर काम!
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मनोनीत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शपथ लेने से पहले ही उनके ‘मिनिमम गवर्नमेंट- मैक्सिमम गवर्नेंस’ के मंत्र को अमल में लाने की कवायद जोर पकड़ती दिख रही है।
केंद्रीय सचिवालय ने मोदी सरकार की प्राथमिकताओं की सूची तैयार करनी शुरू कर दी है। इसके तहत कुछ विभागों और मंत्रालयों का एक मंत्रालय में विलय करने के प्रस्ताव के साथ नौकरशाहों से यह भी पूछा जा रहा है कि यूपीए 2 ने क्या गलतियां कीं।
कैबिनेट सचिव अजीत सेठ ने सभी विभागों के सचिवों से अपने मंत्रालय के बारे में प्रेजेंटेशन तैयार करने को कहा है। अजीत सेठ नई सरकार के काम काज संभालने पर प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) और एनडीए सरकार के समक्ष ब्लूप्रिंट तैयार करने के लिए लगातार बैठकें कर रहे हैं और प्रतिदिन स्थिति की निगरानी कर रहे हैं।
कैसे लागू होगा मिनिमम गवर्नमेंट और मैक्सिमम गवर्नेंस फार्मूला?
आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि शीर्ष अधिकारियों से पिछले पांच वर्षों की उपलब्धियों और भविष्य के लक्ष्यों के बारे में प्रेजेंटेशन तैयार करने को कहा गया है।
इसके अलावा अधिकारियों से एक विवादित सवाल भी पूछा गया है कि उनकी नजर में वे कौन सी चीजें हैं, जिन्हें यूपीए 2 सरकार को नहीं करना चाहिए था।
अधिकारियों से पूछा जा रहा है कि सरकारी महकमे के आकार को किस तरह से कम किया जाए, जिससे मिनिमम गवर्नमेंट और मैक्सिमम गवर्नेंस के फार्मूले को लागू करना और बेहतर समन्वय सुनिश्चित किया जा सके। इससे निवेशकों और आम लोगों तक यह संदेश मजबूती से पहुंचाया जा सकेगा कि मोदी सरकार काम करने में यकीन करती है।
कई मंत्रालयों को किया जाएगा एक?
इसके लिए पहले से ही बात की जा रही है कि कोयला और ऊर्जा मंत्रालय को अक्षय ऊर्जा मंत्रालय के साथ मिला कर एक ऊर्जा मंत्रालय के तहत लाया जा सकता है।
हालांकि अधिकारियों का कहना है कि अक्षय ऊर्जा मोदी का पंसदीदा विषय है। ऐसे में यह मंत्रालय अपना अस्तित्व बनाए रख सकता है और अगले छह माह के लिए नए विजन के साथ रोडमैप पेश किया जा सकता है।
एक विचार यह भी है कि पंचायती राज और ग्रामीण विकास मंत्रालय का विलय कर दिया जाए। इसी तरह से पर्यटन, संस्कृति मंत्रालय को नागरिक उड्डयन मंत्रालय के साथ मिला कर एक बड़ा मंत्रालय बनाया जा सकता है।
वहीं, कंपनी मामलों के मंत्रालय का विलय वित्त मंत्रालय में करने की बात है। इसके अलावा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को मंजूरी का विषय वित्त मंत्रालय के तहत लाया जा सकता है।
चिदंबरम ने पूर्व में पेश किया था ये प्रस्ताव
आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक आंतरिक सुरक्षा को गृह मंत्रालय से अलग करने पर भी बातचीत हो रही है। पूर्व गृह मंत्री पी चिदंबरम भी यह प्रस्ताव पेश कर चुके हैं। इसके अलावा विदेश व्यापार महानिदेशालय को वाणिज्य मंत्रालय के साथ विदेश मंत्रालय में मिलाने का प्रस्ताव भी है।
इसी तरह से यह भी महसूस किया जा रहा है कि पीएमओ और नक्सल प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के बीच समन्वयन बनाने के लिए गृह मंत्रालय में अलग से एक डिवीजन बनाया जाए। यह बात साफ है कि मोदी सरकार अहम परियोजनाओं को लागू करने के लिए विशेषज्ञों और टेक्नोक्रेट पर निर्भर करेगी।
ऐसे में तेज रफ्तार से चलने वाली ट्रेन के प्रोजेक्ट के लिए दिल्ली मेट्रो के पूर्व प्रमुख ई श्रीधरन सटीक बैठते हैं। यह प्रोजेक्ट स्पेशल पर्पज व्हीकल (एसपीवी) के जरिए या रेलवे के तहत एक अलग डिवीजन बना कर पूरा किया जा सकता है।