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रेल और पावर पर होगा मोदी सरकार का फोकस
नई दिल्ली /सुजय मेहदूदिया
Updated Thu, 03 Jul 2014 08:55 AM IST
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नरेंद्र मोदी सरकार 10 जुलाई को अपना पहला बजट पेश करने की तैयारी कर रही है। ऐसे में वित्त मंत्री अरुण जेटली के सामने सबसे अहम काम इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर जैसे सड़क, रेलवे, बंदरगाह, राजमार्ग, और ऊर्जा क्षेत्र को मजबूती देने का होगा।
इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के कमजोर प्रदर्शन के कारण न सिर्फ भारत ऊंची विकास दर हासिल नहीं कर पा रहा है, बल्कि इसकी वजह से नौकरियों का सृजन और निवेशकों का विश्वास भी बहाल नहीं हो पा रहा है। आर्थिक सुस्ती खत्म होने के संकेत नहीं मिल रहे हैं और देश की आर्थिक विकास दर 5 फीसदी से कम है। ऐसे में भारत का इंफ्रास्ट्रक्चर अर्थव्यवस्था का दबाव सहन नहीं कर पा रहा है।
अगले पांच वर्ष में इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में करीब 58,000 अरब रुपये (970 अरब डॉलर) निवेश का लक्ष्य निजी क्षेत्र की मदद और दूसरी पीढ़ी के आर्थिक सुधारों को आगे बढ़ाने पर ही संभव होगा। विशेषज्ञों और अर्थशस्त्रियों बीच आम धारणा है कि इंफ्रास्ट्रक्चर ग्रोथ में तेजी आने से नौकरियों का सृजन करने में मदद मिलेगी। इससे ऊंची आर्थिक विकास दर हासिल करने और उद्यमिता को बढ़ावा देने में भी मदद मिलेगी।
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भारतीय अर्थव्यवस्था के समक्ष चुनौतियों का प्रभावी तरीके से सामना करने के लिए लालफीताशाही, नीतिगत फैसलों में देरी को खत्म करना होगा। इसके अलावा समुचित नियामकीय तंत्र, इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट को तय समय सीमा में मंजूरी और उचित फंडिंग पैटर्न भी जरूरी है। बजट में छोटे एयरपोर्ट को जोड़ने, हाई-स्पीड ट्रेनों के डायमंड क्वाड्रीलैटरल और देश के दूरदराज के हिस्सों को बंदरगाहों से जोड़ने के लिए सागर माला प्रोजेक्ट की घोषणा हो सकती है। इससे देश के लिए जरूरी इंफ्रारूट्रक्चर को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
रेलवे के आधुनिकीकरण और पुनर्गठन के लिए तेज, निचेश के अनुकूल सार्वजनिक निजी भागीदारी तंत्र बनाए जाने की संभावना है। इंफ्रास्ट्रक्चर एजेंडे में रेलवे शीर्ष पर है। छोटे शहरों को एयरपोर्ट से जोड़ने के लिए कम लागत वाले एयरपोर्ट विकसित करने की नीति की घोषणा भी सरकार कर सकती है। इसी तरह से मोदी सरकार हाई स्पीड ट्रेनों के डामंड क्वाड्रीलैटरल प्रोजेक्ट की घोषणा भी कर सकती है। देश में फ्रेट कॉरिडोर का एक नेटवर्क होगा, जिसमें तेजी से खराब होने वाले कृषि उत्पादों के लिए विशेषरूप से एग्री-रेल नेटवर्क शामिल है।
वित्तीय जरूरतों के लिए इन्नोवेटिव तरीकों को अपना कर रेलवे में निवेश बढ़ाया जाएगा। पिछले कुछ वर्षों की जड़ता को समाप्त करने के मकसद से राष्ट्रीय राजमार्ग कार्यक्रम को लागू करने के लिए एक तेज, समयबद्ध और बेहतर निगरानी तंत्र का कार्यक्रम बजट में आने की उम्मीद है। ऊर्जा क्षेत्र में ईंधन की किल्लत, पर्यावरण मंजूरी न मिलने और भूमि अधिग्रहण में दिक्कतों के कारण हजारों करोड़ रुपये के उत्पादन और वितरण के प्रोजेक्ट रुके हुए हैं।
देश के पास कोयले का लगभग 500 अरब टन का भंडार है, लेकिन कोयला सेक्टर की अक्षमता खास कर कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) के एकाधिकार के कारण इसके बहुत छोटे हिस्से का ही दोहन अब तक किया जा सका है। इसके अलावा कोयला घोटाले के दाग के कारण 126 कोल ब्लॉकों को विकसित करने का काम ठप हो गया है।
वित्त मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि सरकार सरकार नया इन्वेस्टमेंट व्हीकल, इंफ्रास्ट्रक्चर बिजनेस ट्रस्ट शुरू करने की योजना बना रही है। इससे इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपर्स को प्रतिस्पर्धी दरों पर लंबी अवधि के लिए पूंजी मिल सकेगी। बजट में इस नए व्हीकल के लिए कर तरह की के कर प्रोत्साहन की घोषणा सरकार कर सकती है।
उद्योग संगठन सीआईआई ने अर्थव्यवस्था में तेजी लाने के लिए मैन्यूफैक्चरिंग को बढ़ावा देने को सरकार की पहली प्राथमिकता के तौर पर देखे जाने की मांग की है। मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देने के लिए निवेश भत्ते की थ्रैसहोल्ड लिमिट घटा कर 50 करोड़ रुपये की जानी चाहिएए, इससे मझोले आकार की कंपनियां भी इसमें शामिल होने के लिए प्रोेत्साहित होंगी।
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इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के कमजोर प्रदर्शन के कारण न सिर्फ भारत ऊंची विकास दर हासिल नहीं कर पा रहा है, बल्कि इसकी वजह से नौकरियों का सृजन और निवेशकों का विश्वास भी बहाल नहीं हो पा रहा है। आर्थिक सुस्ती खत्म होने के संकेत नहीं मिल रहे हैं और देश की आर्थिक विकास दर 5 फीसदी से कम है। ऐसे में भारत का इंफ्रास्ट्रक्चर अर्थव्यवस्था का दबाव सहन नहीं कर पा रहा है।
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अगले पांच वर्ष में इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में करीब 58,000 अरब रुपये (970 अरब डॉलर) निवेश का लक्ष्य निजी क्षेत्र की मदद और दूसरी पीढ़ी के आर्थिक सुधारों को आगे बढ़ाने पर ही संभव होगा। विशेषज्ञों और अर्थशस्त्रियों बीच आम धारणा है कि इंफ्रास्ट्रक्चर ग्रोथ में तेजी आने से नौकरियों का सृजन करने में मदद मिलेगी। इससे ऊंची आर्थिक विकास दर हासिल करने और उद्यमिता को बढ़ावा देने में भी मदद मिलेगी।
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भारतीय अर्थव्यवस्था के समक्ष चुनौतियों का प्रभावी तरीके से सामना करने के लिए लालफीताशाही, नीतिगत फैसलों में देरी को खत्म करना होगा। इसके अलावा समुचित नियामकीय तंत्र, इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट को तय समय सीमा में मंजूरी और उचित फंडिंग पैटर्न भी जरूरी है। बजट में छोटे एयरपोर्ट को जोड़ने, हाई-स्पीड ट्रेनों के डायमंड क्वाड्रीलैटरल और देश के दूरदराज के हिस्सों को बंदरगाहों से जोड़ने के लिए सागर माला प्रोजेक्ट की घोषणा हो सकती है। इससे देश के लिए जरूरी इंफ्रारूट्रक्चर को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
रेलवे के आधुनिकीकरण और पुनर्गठन के लिए तेज, निचेश के अनुकूल सार्वजनिक निजी भागीदारी तंत्र बनाए जाने की संभावना है। इंफ्रास्ट्रक्चर एजेंडे में रेलवे शीर्ष पर है। छोटे शहरों को एयरपोर्ट से जोड़ने के लिए कम लागत वाले एयरपोर्ट विकसित करने की नीति की घोषणा भी सरकार कर सकती है। इसी तरह से मोदी सरकार हाई स्पीड ट्रेनों के डामंड क्वाड्रीलैटरल प्रोजेक्ट की घोषणा भी कर सकती है। देश में फ्रेट कॉरिडोर का एक नेटवर्क होगा, जिसमें तेजी से खराब होने वाले कृषि उत्पादों के लिए विशेषरूप से एग्री-रेल नेटवर्क शामिल है।
वित्तीय जरूरतों के लिए इन्नोवेटिव तरीकों को अपना कर रेलवे में निवेश बढ़ाया जाएगा। पिछले कुछ वर्षों की जड़ता को समाप्त करने के मकसद से राष्ट्रीय राजमार्ग कार्यक्रम को लागू करने के लिए एक तेज, समयबद्ध और बेहतर निगरानी तंत्र का कार्यक्रम बजट में आने की उम्मीद है। ऊर्जा क्षेत्र में ईंधन की किल्लत, पर्यावरण मंजूरी न मिलने और भूमि अधिग्रहण में दिक्कतों के कारण हजारों करोड़ रुपये के उत्पादन और वितरण के प्रोजेक्ट रुके हुए हैं।
देश के पास कोयले का लगभग 500 अरब टन का भंडार है, लेकिन कोयला सेक्टर की अक्षमता खास कर कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) के एकाधिकार के कारण इसके बहुत छोटे हिस्से का ही दोहन अब तक किया जा सका है। इसके अलावा कोयला घोटाले के दाग के कारण 126 कोल ब्लॉकों को विकसित करने का काम ठप हो गया है।
वित्त मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि सरकार सरकार नया इन्वेस्टमेंट व्हीकल, इंफ्रास्ट्रक्चर बिजनेस ट्रस्ट शुरू करने की योजना बना रही है। इससे इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपर्स को प्रतिस्पर्धी दरों पर लंबी अवधि के लिए पूंजी मिल सकेगी। बजट में इस नए व्हीकल के लिए कर तरह की के कर प्रोत्साहन की घोषणा सरकार कर सकती है।
उद्योग संगठन सीआईआई ने अर्थव्यवस्था में तेजी लाने के लिए मैन्यूफैक्चरिंग को बढ़ावा देने को सरकार की पहली प्राथमिकता के तौर पर देखे जाने की मांग की है। मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देने के लिए निवेश भत्ते की थ्रैसहोल्ड लिमिट घटा कर 50 करोड़ रुपये की जानी चाहिएए, इससे मझोले आकार की कंपनियां भी इसमें शामिल होने के लिए प्रोेत्साहित होंगी।