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प्राकृतिक संसाधनों के आवंटन के लिए बनेगी व्यापक ऊर्जा नीति
सुजय मेहदूदिया/नई दिल्ली
Updated Thu, 02 Oct 2014 06:44 PM IST
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मोदी सरकार प्राकृतिक संसाधनों के आवंटन के लिए एक नई एकीकृत और व्यापक ऊर्जा नीति लाने की तैयारी कर रही है। इसके अंतर्गत अगले 25 साल की प्लानिंग को ध्यान में रखते हुए बिजली, पेट्रोलियम, कोयला और इससे संबंधित सेक्टरों को शामिल किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट द्वारा 214 कोल ब्लॉकों के निरस्त किए जाने और प्राकृतिक गैस के अन्वेषण, उत्पादन एवं मूल्य निर्धारण का मसला शीर्ष कोर्ट में लंबित रहने के बाद सरकार ने इस दिशा में तेजी से कदम बढ़ाने का फैसला किया है।
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सरकार में उच्च पदस्थ सूत्रों ने अमर उजाला को बताया कि मोदी सरकार इस मसले पर परामर्श प्रक्रिया शुरू कर चुकी है। इसके साथ ही सरकार अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों और परामर्शदाताओं के साथ इस मसले पर विचार-विमर्श कर रही है कि ऊर्जा नीति खासकर देश के कोयला एवं गैस संसाधनों के अन्वेषण के संबंध में कैसे तैयार की जाए।
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योजना आयोग (ऊर्जा विभाग) ने कोयला आपूर्ति से जुड़ी नीतियां, ऊर्जा दक्षता और अन्य संबद्ध क्षेत्रों के संबंध में एकीकृत ऊर्जा नीति (आईईपी) के कार्यान्वयन की प्रगति पर विस्तृत जानकारियां उपलब्ध कराई हैं। कोयला आपूर्ति के संबंध में आयोग ने देश में कोयला आपूर्ति को बेहतर बनाने के लिए केंद्रीय एवं राज्य की सरकारी कंपनियों और निजी क्षेत्र को कैप्टिव खदान के रूप में कोल ब्लॉकों का आवंटन करने का प्रस्ताव दिया है।
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इसके अलावा, इस बात पर भी जोर दिया गया कि कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) के अधिकार क्षेत्र वाले जिन ब्लॉकों से 2016-17 तक उत्पादन शुरू नहीं किया जा सकता है, तो उन्हें अन्य पात्र कंपनियों को विकास एवं उत्पादन के लिए दिया जाना चाहिए। पात्र कंपनियों का चयन अंतरराष्ट्रीय खनन विकास ऑरपेटर्स (एमडीओएस) के जरिए किया जाना चाहिए। इसमें अधिक फोकस अंडरग्राउंड खदानों पर होना चाहिए। अधिकारियों का कहना है कि सरकार परामर्श प्रक्रिया तेजी से कर रही है और प्राकृतिक संसाधनों के आवंटन पर व्यापक नीति जल्द लाएगी।
योजना आयोग पनबिजली ऊर्जा और कोयला जैसे प्राथमिक ऊर्जा संसाधन संपन्न राज्यों से संसाधनों के दोहन के लिए मुनाफे की न्यायपूर्ण हिस्सेदारी की पेशकश पर विचार कर रहा है। संसाधन संपन्न राज्यों को उनके संसाधनों के दोहन पर पर्याप्त मुनाफा नहीं मिलता है, इसको ध्यान में रखते हुए आयोग ने सुझाव दिया है कि इस तरह की परियोजनाओं पर विशेष लेवी लगाई जानी चाहिए और ऐसे राज्यों को अधिमान्य दरों (प्रिफरेंशियल टैरिफ) पर बिजली उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
इसके अलावा ऊर्जा उत्पादन पर पर्यावरण प्रबंधन के लिए विशेष शुल्क के अधिभार पर भी चर्चा की गई। हालांकि, खनन मंत्रालय एमएमडीआर बिल, 2011 में खनिज संसाधनों से संपन्न राज्यों को अधिक लाभ देने का प्रस्ताव कर चुका है। साथ ही मंत्रालय ने खनिज संपन्न राज्यों के पक्ष में बिल में संशोधन करने की सिफारिश की। हालांकि, अभी इसे प्रभावी बनाना शेष है।
ऊर्जा दक्षता और आपूर्ति से संबंधित प्रबंधन एकीकृत ऊर्जा नीति का एक अहम पहलू होगा। इस संबंध में आईईपी के कार्यान्वयन पर नवीनतम ब्योरा उपलब्ध कराते हुए योजना आयोग ने मोदी सरकार को बताया है कि ताप विद्युत संयंत्रों की ऊर्जा दक्षता बढ़ाने की जरूरत है।