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ऑनलाइन होगी सरकारी मंजूरी की सारी प्रक्रिया
नई दिल्ली /सुजय मेहदूदिया
Updated Tue, 02 Sep 2014 08:55 AM IST
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सरकारी तंत्र में व्याप्त लालफीताशाही, भ्रष्टाचार खत्म करने और प्रशासन को पारदर्शी और प्रभावी बनाने की दिशा में बड़ी पहल करते हुए नरेंद्र मोदी सरकार ने केंद्र सरकार से मंजूरी हासिल करने की सभी प्रक्रियाओं को ऑनलाइन बनाने का फैसला किया है।
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इसके तहत 31 मार्च 2015 तक राज्य सरकारों की मदद से पर्यावरण, वन और खनन, कोयला, सड़क आदि सेक्टर से जुड़ी मंजूरी हासिल करने की प्रक्रिया को ऑनलाइन बनाने का फैसला किया गया है। जानकारी मिली है कि वन एवं पर्यावरण मंत्रालय में इस माह के पहले सप्ताह से पर्यावरण मंजूरी ऑनलाइन हो जाएगी और कारोबारी या कॉरपोरेट को मंजूरी के लिए आवेदन जमा कराने के लिए संबंधित मंत्रालय के कार्यालय नहीं आना होगा।
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केंद्र सरकार एक स्पेशल पोर्टल तैयार कर रही है, जहां संबंधित व्यक्ति विशेष या कंपनियों को अपना आवेदन ऑनलाइन दाखिल करना होगा। इस प्रक्रिया में विभाग या सरकारी अधिकारी की जरूरत नहीं होगी। इसके अलावा सरकार इस वर्ष के अंत तक एक एडवांस्ड ई- बिज पोर्टल भी लांच करेगी।
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इसके तहत मौजूदा खामियों को दूर कर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए भारत में कारोबार करना आसान बनाया जाएगा। सरकार के उच्चपदस्थ सूत्रों का कहना है कि यह पहल खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की जा रही है। प्रधानमंत्री ने इस नए पोर्टल को लांच करने की समय सीमा 31 मार्च 2015 तय की है।
इस प्रोजेक्ट से जुड़े औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग (डीआईपीपी) के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि इस पोर्टल का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि इस पोर्टल की शुरूआत के बाद किसी इंडस्ट्री, व्यक्ति विशेष या कॉरपोरेट को मंजूरी के लिए आवेदन दाखिल करने किसी कार्यालय में न जाना पड़े।
इस पहल का मकसद है कि मंजूरी इस पोर्टल के जरिए मिले और गैर-पारदर्शी स्ट्रक्चर को खत्म किया जाए। सकारात्मक बात यह है कि 16 राज्यों ने पहले ही स्टेट प्रोजेक्ट मॉनीटरिंग ग्रुप बना लिया है। राज्यों ने यह पहल केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर इसी तरह का तंत्र बनाने के बाद की है।
प्रोजेक्ट मॉनीटरिंग ग्रुप (पीएमजी) के पास पोर्टल पर 25 लाख करोड़ रुपये की लागत वाले 450 से अधिक प्रोजेक्ट हैं। इनमें से 5.75 लाख करोड़ रुपये की लागत वाले 170 प्रोजेक्ट को पहले ही मंजूरी मिल चुकी है। शेष प्रोजेक्ट मंजूरी मिलने की प्रक्रिया में हैं। इससे इंफ्रास्ट्रक्चर इनवेस्टमेंट साइकल को बढ़ावा मिला है और इससे निवेश और निवेशकों की धारणा के मोर्चे पर सकारात्मक माहौल बना है।
मोदी सरकार का मूल मंत्र सभी प्रक्रियाओं को आनलाइन करना है। इंडस्ट्री को अपना आवेदन आनलाइन जमा कराने को कहा जाएगा और वे अपने आवेदन को भी ट्रैक कर सकेंगे। केंद्र सरकार सभी संबंधित विभागों के लिए आवेदन पर फैसला करने के लिए निश्चित समय सीमा तय करेगी। इस समय सीमा में फैसला न होने पर संबंधित अधिकारी को देरी का कारण स्पष्ट करना होगा।
केंद्र सरकार ने पर्यावरण मंत्रालय, कोयला मंत्रालय, खनन मंत्रालय जैसे विभिन्न विभागों में सभी मंजूरी और राज्य स्तर पर जरूरी मंजूरी की पहचान करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अब तक 60 ऐसी मंजूरी की पहचान कर ली गई है। इसमें से 25 मंजूरी केंद्र सरकार और 35 मंजूरी राज्य सरकारों से जुड़ी है।
डीजीएफटी, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन, इंप्लाई स्टेट इंश्योरेंस कॉरपोरेशन और डीआईपीपी ने भी इसी तरह के प्रोजेक्ट पर काम शुरू किय है। इन विभागों को डीआईपीपी द्वारा तैयार किए जा रहे ई-बिज पोर्टल से जोड़ा जाएगा। इस पोर्टल पर इन स्टॉप सोल्यूशन जैसी सुविधा दी जाएगी।
पर्यावरण और वन मंजूरी जैसे मामलों में कई स्तरों पर जाना होता है और इसमें ज्यादा समय लगता है। ऐसे में सरकार इस बात पर विचार कर रही है कि क्या इन स्तरों को कम किया जा सकता है या स्थानीय स्तर पर अन्य अधिकारियों को अधिकार देकर प्रक्रिया में लगने वाले समय को कम किया जा सके। सरकार का मकसद है कि प्रक्रियाओं को तेज किया जा सके।