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सरकार बढ़ाए ‘कर आतंकवाद’ खत्म करने के कदम
नई दिल्ली/ सुजय मेहदूदिया
Updated Wed, 12 Nov 2014 09:17 AM IST
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केंद्र में यूपीए सरकार के कार्यकाल में अरुण जेटली और नरेंद्र मोदी ने कई बार सरकार पर ‘कर का आतंक’ (टैक्स टेरेरिज्म) का आरोप लगाते हुए सरकार में आने पर इसे खत्म करने की बात कही थी। अब केंद्र में मोदी सरकार को आए हुए और अरुण जेटली के वित्त मंत्री बने हुए छह माह से भी ज्यादा गुजर जाने के बाद भी इस ओर कोई कदम बढ़ता नहीं दिख रहा है।
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मोदी सरकार ने न तो पिछली तारीख से (रेट्रोस्पेक्टिव) कर प्रावधानों को लागू नहीं करने का कोई भरोसा दिलाया है, न ही ट्रांसफर प्राइसिंग संबंधी प्रावधानों को लेकर चली आ रही अनिश्चितता को खत्म कर इस संबंध में निवेशकों की आशंकाओं के समाधान का कोई प्रयास किया गया है।
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वर्ष 2011 में देश की अर्थव्यवस्था ने मंदी से उबर कर तेजी की ओर कदम बढ़ाया ही था, जब वर्तमान तत्कालीन वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के विपरीत कर प्रावधान को पुरानी तारीख से लागू करते हुए ट्रांसफर प्राइसिंग के मामले में वोडाफोन से करवसूली करने का फैसला किया था। इस मामले में लंबी कानूनी लड़ाई के बाद बीते दिनों वोडाफोन को मुकदमे में जीत हासिल हुई है।
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वोडाफोन का मामला एक ऐसा मामला साबित हुआ जिसने विदेशी निवेशकों और कंपनियों को न सिर्फ भारत से निवेश वापस लेने की ओर बढ़ाया, बल्कि भारत में उनकी भावी विस्तार योजनाओं को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया। इससे उनके मन में यह डर भी भर गया कि भारत में निवेश या कारोबार करने पर कभी भी उनके ऊपर टैक्स और कानूनों की मार पड़ सकती है।
उस समय इन मामलों पर सरकार की तीखी आलोचना करने वाली भाजपा के प्रचंड बहुमत के साथ सरकार में आने और मोदी सरकार को काम करते हुए छह माह गुजर जाने के बावजूद पिछली तारीख से कर कानून लागू करने के चलन को खत्म करने की दिशा में कोई कदम बढ़ाना तो दूर, इसका कोई संकेत भी अबतक नहीं दिया गया है। ध्यान देने वाली बात यह भी है कि इस समय भाजपा के पास लोकसभा में तो तगड़ा बहुमत है ही, राज्य सभा में भी उसे यूपीए-2 के कार्यकाल में हुई चूक को देखते हुए इस मामले में कांग्रेस का समर्थन मिल सकता है।
इसके संकेत भी हाल ही में मिल चुके हैं, जब बीते सप्ताह पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने इस बात पर आश्चर्य जताया कि तगड़े बहुमत के बाद भी एनडीए सरकार रेट्रोस्पेक्टिव कर प्रावधानों को वापस लेने की दिशा में कोई कदम नहीं बढ़ा रही है। इसके अलावा बड़ी संख्या में घरेलू और विदेशी निवेशक भी मोदी सरकार द्वारा इस ओर अबतक कोई कदम न उठाए जाने को लेकर कई बार सवाल उठा चुके हैं। इस नकारात्मक माहौल को खत्म किए बिना भारत में निवेश या विस्तार का कोई कदम न बढ़ाने की बात भी उनकी ओर से कही गई है।
सरकार के इस रवैये से वोडाफोन का मामले में अभी समाधान की राह नहीं दिख रही है। इसी तरह ट्रांसफर प्राइसिंग के मामले में भी मोदी सरकार ने निवेशकों की उम्मीदों को पूरा करने की दिशा में अब तक कोई कदम नहीं बढ़ाया है। यह मामला देश में टैक्स टेरेरिज्म की बात उठने की सबसे बड़ी वजह बना था।
हाल ही में बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा अपने एक आदेश में इस प्रावधान को लागू किए जाने को लेकर कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर स्थिति स्पष्ट किए जाने के बावजूद केंद्र सरकार ने अबतक इस दिशा में कोई कदम बढ़ाने के बजाय चुप्पी साधे रखने का रुख अपनाया हुआ है।