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पूर्ण परिवर्तनीयता की ओर बढ़ रहे हैं भारत के कदम

Wed, 15 Apr 2015 09:17 PM IST
नई दिल्ली/ सुजय मेहदूदिया
नई दिल्ली/ सुजय मेहदूदिया Updated Wed, 15 Apr 2015 09:17 PM IST
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Modi Government hints at moving towards full capital account convertibility

भारत को दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल करने के लिए अभी कई बड़े नीतिगत कदम उठाने की जरूरत है। यह बात कहते हुए वित्त राज्य मंत्री जयंत सिन्हा ने संकेत दिया कि सरकार आने वाले दिनों में पूंजी खाते की पूर्ण परिवर्तनीयता की ओर कदम बढ़ा सकती है। इसकी वकालत भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर रघुराम राजन भी करते रहे हैं।

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सिन्हा ने कहा कि अगर हमें भारत को ग्लोबल स्तर पर एक अग्रणी अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित करना है, तो हमें समय के साथ कई नीतिगत कदम उठाने होंगे और कई चीजें करनी होंगी। इसे करने के लिए हमें अपने पूंजी बाजार को और व्यापक और गहरा बनाना होगा। पूंजी खाते की परिवर्तनीयता भी इस लिहाज से काफी महत्वपूर्ण है। वैश्विक अर्थ व्यवस्था में हमें निश्चित रूप से अपनी उचित भूमिका और जिम्मेदारी निभानी होगी। इसके लिए हमें परिवर्तनीयता की ओर कदम बढ़ाना होगा।
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इससे पहले वित्त मंत्री अरुण जेटली भी बड़े सुधारों की जरूरत जताते हुए आने वाले महीनों में कुछ वित्तीय सुधार किए जाने का संकेत दे चुके हैं। विदेशी वित्तीय संस्थान भी देश में बड़े वित्तीय सुधारों और जमीनी स्तर पर कारोबार करने की सहूलियतों को बढ़ाने की जरूरत जता चुके हैं। इसके अलावा सिन्हा का बयान इस संदर्भ में भी प्रासंगिक हो जाता है, क्यों कि आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन भी हाल ही में कह चुके हैं कि रिजर्व बैंक आने वाले कुछ वर्ष में पूंजी खाते की पूर्ण परिवर्तनीयता की इजाजत देने पर विचार कर रहा है।
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राजन ने कहा था कि पूंजी का प्रवाह बढ़ाने को लेकर रिजर्व बैंक खुले दिमाग से विचार कर रहा है। राजन ने कहा था कि पूंजी के प्रवाह के मामले में केवल ऋण बाजार से जुड़ी कुछ बंदिशें हैं, वह भी खासकर कम अवधि के कर्ज (डेट) निवेशों में।

गौरतलब है कि पूंजी की पूर्ण परिवर्तनीयता का मतलब यह है कि विदेशी निवेशक अपनी इच्छा के मुताबिक अपने धन को अपने देश में प्रचलित मुद्रा में वापस भेज सकेंगे। फिलहाल भारत में इसकी इजाजत नहीं है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने हाल ही में गुजरात में देश के पहले अंतरराष्ट्रीय फाइनेंस सेंटर का उद्घाटन किया है। रुपये की पूर्ण परिवर्तनीयता इस ग्लोबल फाइनेंसियल सर्विस हब के प्रभावशाली ढंग से काम कर पाने के लिए भी काफी महत्वपूर्ण है। गौरतलब यह है कि कई आर्थिक विश्लेषक पूर्ण परिवर्तनीयता के बजाय आरबीआई की मौजूदा आंशिक मौद्रिक नियंत्रण की नीति की भी सराहना करते हैं।


उनका मानना है कि इसी के चलते रुपये को बड़ी गिरावट का शिकार होने से बचाए रखा है, जबकि मुद्रा की पूर्ण परिवर्तनीयता के चलते उस समय (1997-98) में दक्षिण एशिया की कई मुद्राओं में भारी गिरावट देखने को मिली थी। इसी तरह आरबीआई के मौद्रिक नियंत्रण ने 2013 में अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा बांड खरीद में कटौती (टेपरिंग) की घोषणा के वक्त भी रुपये को धराशाई होने से बचाए रखा था। उस समय विदेश निवेशकों द्वारा 20 अरब डॉलर से भी अधिक की पूंजी निकाले जाने पर भी रुपया बहुत बड़ी गिरावट का शिकार होने से बचा रहा।

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