रिलायंस को पेनाल्टी से राहत दिलाने की जुगत में मोदी सरकार
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क्या नरेंद्र मोदी सरकार रिलायंस इंडस्ट्रीज को केजी बेसिन विवाद मामले में उस पर लगाई गई पेनाल्टी से राहत दिलाने की कोशिश कर रही है? पिछले कुछ दिनों के दौरान इस संबंध में जो घटनाक्रम सामने आए हैं, वह इस बात की ओर इशारा कर रहे हैं कि पेट्रोलियम एवं नेचुरल गैस मंत्रालय और नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) के बीच रिलायंस इंडस्ट्रीज पर लगाई गई अतिरिक्त 1.7 अरब डॉलर की पेनाल्टी को लेकर गंभीर मतभेद हैं। सीएजी राष्ट्रपति को सौंपी अपनी अंतिम रिपोर्ट पर अड़ा है। उसका कहना है कि रिलायंस पर लगाई गई पेनाल्टी जायज है।
कैग्ा अपने रूख पर कायम
दिलचस्प है कि, सीएजी अपने रुख पर कायम है। उसने रिलायंस इंडस्ट्रीज पर कुल 2.7 अरब डॉलर की पेनाल्टी को बरकरार रखते हुए अपनी रिपोर्ट को मंजूरी के लिए राष्ट्रपति को सौंप दिया है। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद ही सीएजी की इस रिपोर्ट को संसद में पेश किया जाएगा। यह देखने वाली बात होगी कि, क्या इस रिपोर्ट को संसद में पेश किया जाएगा, जबकि चालू सत्र में केवल दो दिन शेष हैं।
रिलायंस पर लगाए जुर्माने की होगी समीक्षा
पेट्रोलियम मंत्रालय के उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि मसौदा रिपोर्ट आने के बाद कुछ समय पहले इसे मंत्रालय और रिलायंस इंडस्ट्रीज सहित सभी शेयरधारकों को उनकी टिप्पणी के लिए भेजा गया।
अपनी रिपोर्ट में सीएजी पेट्रोलियम मंत्रालय के उस रुख से सहमत नहीं है, जिसमें मंत्रालय ने केजी डी6 बेसिन से अनुबंध की शर्तों के अनुरूप पहले चरण में निश्चित मात्रा में गैस उत्पादन नहीं करने की एवज में रिलायंस पर लगाई गई 1.7 अरब डॉलर की पेनाल्टी की समीक्षा करने की बात कही है। हालांकि, पेट्रोलियम मंत्रालय ने रिलायंस इंडस्ट्रीज पर लगाई गई करीब 1 अरब डॉलर की दूसरी पेनाल्टी का विरोध नहीं किया है।
रिलायंस के खिलाफ बनता है मामला
मंत्रालय में हरेक के लिए चौंकाने वाली बात यह है कि मंत्रालय के विभिन्न मुद्दों खासकर गैस मूल्य निर्धारण पर जो सरकार गरीबों के हित में अपना रुख प्रोजेक्ट करने की कोशिश कर रही है, उसने रिलायंस पर इतनी बड़ी पेनाल्टी लगाए जाने के सीएजी के दावे को चुनौती देने का फैसला किया है। जबकि, यह सामान्य जानकारी में है कि केजी बेसिन डी6 ब्लॉक से गैस उत्पादन में गिरावट आई है।
केवल इतना ही नहीं, रिलायंस इंडस्ट्रीज के खिलाफ उत्पादन लागत बढ़ा चढ़ाकर दिखाने का मामला भी साबित हो चुका है। सरकार द्वारा नियुक्त एक स्वतंत्र विशेषज्ञ ने माना है कि केजी बेसिन से उत्पादन जान बूझकर घटाया गया, क्योंकि रिलायंस इंडस्ट्रीज और उसकी साझीदार बीपी व निको रिर्सोसेज ने तय संख्या में कुओं की खुदाई नहीं की, जो कि प्रोडक्शन शेयरिंग कांट्रैक्ट (पीएससी) के नियमों का उल्लंघन था। नतीजतन, तत्कालीन पेट्रोलियम मंत्री जयपाल रेड्डी और डीजीएच ने रिलायंस इंडस्ट्रीज पर पेनाल्टी लगाई थी।
रिलायंस को फायदा पहुंचाने की तैयारी
एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि पेट्रोलियम मंत्रालय का नजरिया इस मसले पर निश्चित रूप से प्रतिकूल रहेगा और पेनाल्टी की समीक्षा का ताजा प्रयास साफ तौर पर नरेंद्र मोदी सरकार की ओर से रिलायंस इंडस्ट्री को राहत दिलाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
सरकार का गरीब समर्थक मुखौटा आंखों में धूल झोंकने वाला है और परदे के पीछे सभी प्रयास रिलायंस को उपकृत करने के किए जा रहे हैं। सीएजी ने अब यह खुलासा किया है कि कैसे रिलायंस केंद्र सरकार की मदद से केजी बेसिन से पैसे बना रही है। इसके अलावा, देश को गुमराह किया जा रहा है, प्राकृतिक संसाधनों की लूट हो रही है और अनुबंध की सभी शर्तों का उल्लंघन किया जा रहा है जो किया राष्ट्रहित के लिए गंभीर खतरा है।
सीएजी ने पाया कि रिलायंस इंडस्ट्रीज ने गैस रिजर्व का बढ़ा चढ़ाकर अनुमान पेश किया। रिलायंस ने अपनी पूंजीगत लागत में बढ़ोतरी की। अधिकांश खरीद अधिक मूल्य पर की गई। रिलायंस अनुबंध की शर्तों के तहत उत्पादन करने में विफल रही। इतना ही नहीं रिलायंस ने सरकार को फुल प्राफिट पेट्रोलियम का भुगतान नहीं किया। सीएजी ने कहा है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज ने ऑडिट में सहयोग नहीं किया, कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराए और गलत जानकारियां देकर सीएजी को गुमराह करने की कोशिश की।