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कंपनियों को और स्पेक्ट्रम उपलब्ध कराए सरकार : सुनील मित्तल

Fri, 07 Nov 2014 09:18 AM IST
सुजय मेहदूदिया/नई दिल्ली
सुजय मेहदूदिया/नई दिल्ली Updated Fri, 07 Nov 2014 09:18 AM IST
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Mittal strongly bats for more spectrum; seeks balance in spectrum pricing

भारती समूह के चेयरमैन सुनील मित्तल ने टेलीकॉम कंपनियों को देश में और स्पेक्ट्रम दिए जाने जाने की पुरजोर वकालत की है। साथ ही उन्होंने स्पेक्ट्रम मूल्य निर्धारण में संतुलित रुख रखने की आवश्यकता जताई है।

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वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम द्वारा आयोजित इंडियन इकोनॉमिक समिट के दौरान अलग से उन्होंने कहा कि टेलीकॉम इंडस्ट्री को अधिक स्पेक्ट्रम की आवश्यकता है और सरकार को आने वाले दिनों में स्पेक्ट्रम उपलब्ध कराना चाहिए। हम सरकार से और अधिक स्पेक्ट्रम चाहते हैं। प्रत्येक देश के पास स्पेक्ट्रम की एक ही मात्रा है और केवल भारत ही नहीं है, जिसके पास कम स्पेक्ट्रम हैं। लेकिन, इसे अन्य जगहों से खाली करने की आवश्यकता है, जैसा कि अन्य देशों ने भी किया है।
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विगत 15 अक्तूबर को भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने प्रीमियम 900 मेगाहर्ट्ज और 1800 मेगाहर्ट्ज बैंड के लिए स्पेक्ट्रम नीलामी पर अपनी सिफारिशें दी हैं। फिलहाल 900 मेगाहर्ट्ज और 1800 मेगाहर्ट्ज बैंड का इस्तेमाल एयरटेल, वोडाफोन, आइडिया सेलुलर और रिलायंस कम्यूनिकेशंस 2जी जीएसएम मोबाइल सेवाओं के लिए कर रही हैं। सरकार ने 900 मेगाहर्ट्ज बैंड में करीब 184 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम की नीलामी का प्रस्ताव पेश किया है। विभिन्न लाइसेंस के जरिए यह स्पेक्ट्रम फिलहाल इन कंपनियों के पास है। लाइसेंस की मियाद 2015-16 में समाप्त हो रही है।
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चारों टेलीकॉम ऑपरेटरों को अपनी सेवाएं जारी रखने के लिए नए सिरे से स्पेक्ट्रम खरीदना होगा। मित्तल ने कहा कि मैं सरकार से कहना चाहूंगा कि वह पर्याप्त स्पेक्ट्रम उपलब्ध कराए ताकि स्पेक्ट्रम मूल्य निर्धारण के बीच एक संतुलन रहे। यह पूछे जाने पर कि, क्या स्पेक्ट्रम नीलामी की निर्धारित 3 फरवरी की तारीख को टाला जाना चाहिए, मित्तल ने कहा कि नीलामी को क्यों स्थगित करना चाहिए। इंडस्ट्री अधिक स्पेक्ट्रम चाहती है और सरकार को उसे उपलब्ध कराना चाहिए। यही मुद्दा है।


लूप मोबाइल के बिजनेस और आस्तियों के 700 करोड़ रुपये का अधिग्रहण सौदा रद्द किए जाने के मसले पर मित्तल ने कहा कि इस पर विस्तार से देखा जा रहा है। लूप मोबाइल एक छोटा मसला है और मैं नहीं जानता कि इसे इतना बड़ा मुद्दा क्यों बनाया जा रहा है। अधिकांश लूप ग्राहकों ने अपने नंबर पोर्ट करा लिए हैं। यह एक छोटा सौदा था, जो कि खासकर पहली बार ग्राहकों के अधिग्रहण के लिए किया जाने वाला प्रयोग था। यह विलय के संबंध में नहीं था बल्कि सौदे के नवीकरण के संबंध में था।

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