फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   Business archives ›   Ministry to draw up road map for identifying coal blocks for competitive bidding

कोल ब्लॉकों की प्रतिस्पर्धी नीलामी का तैयार हो रहा रोड मैप

Tue, 01 Jul 2014 08:53 AM IST
नई दिल्ली/ सुजय मेहदूदिया
नई दिल्ली/ सुजय मेहदूदिया Updated Tue, 01 Jul 2014 08:53 AM IST
विज्ञापन
Ministry to draw up road map for identifying coal blocks for competitive bidding

कोलगेट घोटाले में केंद्र की पिछली यूपीए सरकार की हुई किरकिरी और इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा सीधी नजर रखे जाने को देखते हुए नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली नई सरकार इस मामले में फूंक-फूंक कर कदम उठा रही है। यही वजह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशभर में कोल ब्लॉकों की प्रतिस्पर्धी ढंग से नीलामी का रोड मैप तैयार करने का निर्देश दिया है। मंत्रालय से इसके लिए तिमाही और सालाना आधार पर एक्शन प्लान पेश करने को कहा गया है।

विज्ञापन


कोयले की आंच में यूपीए सरकार के जले हाथ देख कर प्रधानमंत्री मोदी और कोयला व ऊर्जा मंत्री कोल ब्लॉकों के आवंटन की प्रक्रिया से जुड़ा हर कदम पूरी सतर्कता के साथ बढ़ा रहे हैं। इसी के कोल ब्लॉकों के आवंटन के लिए प्रतिस्पर्धी बोली लगाने की प्रक्रिया अपनाने की तैयारी की जा रही है। हालांकि इसके साथ ही सरकार कोयले आपूर्ति में मौजूदा कमी को देखते हुए इसके उत्खनन में तेजी लाने के लिए ब्लॉक आवंटन की प्रक्रिया में तेजी लाने की कवायद भी कर रही है।
विज्ञापन


देशभर में 126 कोल ब्लॉकों में अनियमितता के मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में अब भी चल रही है। इसे देखते हुए नई सरकार इस मामले में कोई भी ऐसा कदम नहीं उठाना चाहती, जिससे किसी अनियमितता के चलते कोयले की कालिख का कोई दाग उसके दामन पर भी न लग जाए।
विज्ञापन
विज्ञापन


इसके चलते सरकार ने कोल ब्लॉकों के लिए प्रतिस्पर्धी बोलियां लगाने की प्रणाली तैयार करने के लिए कोयला मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव एके दुबे की अध्यक्षता में एक समिति गठित की है। समिति को जल्द से जल्द ब्लॉक आवंटन का रोडमैप तैयार करने व समूची प्रक्रिया में तेजी लाने का फार्मूला सुझाने को कहा गया है।

इससे पहले यूपीए के कार्यकाल के दौरान कोयला मंत्रालय ने मई 2012 में देशभर में 52 कोल ब्लॉकों को चिह्नित किया था। इनमें 13 उत्खनित थे, जबकि 42 ब्लॉकों का उत्खनन क्षेत्रीय स्तर पर किया जाना था। कंपनियों के खुद के इस्तेमाल (कैप्टिव यूज) के लिए इन ब्लॉकों का आवंटन प्रतिस्पर्धी बोलियों के जरिए किया जाना था। मंत्रालय ने इनमें से केवल कुछ ही ब्लॉकों की नीलामी की, जबकि कई खानों को नीलामी के लिए उपयुक्त न पाकर इन्हें कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) या उसकी सहायक कंपनियों को दे दिया गया।

मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है इनमें से क्षेत्रीय उत्खनन वाले 11 ब्लॉक ऐसे थे, जिनकी नीलामी के लिए उपयुक्तता का आकलन किया जाना अब भी बाकी है। नई सरकार द्वारा गठित कमेटी को इन 11 ब्लॉकों के आकलन की जिम्मेदारी भी दी गई है। इसमें देखा जाएगा उत्खनन जारी रहने वाली इन कोयला खान को क्या नीलामी प्रक्रिया में शामिल किया जा सकता है?

गौरतलब है कि कोयला मंत्रालय द्वारा चिह्नित 12 ब्लॉकों में से तीन झिरकीव झिरकी पश्चिमी, तोकीसूद-2 और अंदाल बाबुईसोल पहले ही स्टील, सीमेंट व स्पंज आयरन बनाने वाली कंपनियों को बोली के लिए पेश की जा चुकी हैं। कोयला मंत्रालय की कमेटी ने पाया कि बहुत से कोयला ब्लॉकों में उत्खनन के दौरान कानून-व्यवस्था संबंधी दिक्कतें पेश आने के मामले देखने को मिले है। दूसरी ओर करकोमा, मेगुली, सुरसा और बिचारपुर ईस्ट जैसे ब्लॉकों की भूगर्भीय रिपोर्टें कोर्ट के समक्ष चालू वित्त वर्ष के मध्य तक पेश की जानी हैं।


इससे साल के अंत तक कुछ ब्लॉकों के बोली प्रक्रिया के दायरे में आ जाने के आसार हैं। इसके अलावा मंत्रालय की कमेटी ने कई ब्लॉकों को बोली के तहत लाने से पहले कांबिंग करके उत्खनन के लिहाज से बड़ा करने की भी बात कही है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed