फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   Business archives ›   ministry official against coal india

कोल इंडिया के एकाधिकार के खिलाफ हुए मंत्रालय के अधिकारी

Fri, 30 May 2014 07:46 AM IST
Updated Fri, 30 May 2014 07:46 AM IST
विज्ञापन
ministry official against coal india

सरकारी कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) कोयले के उत्पादन का लक्ष्य पूरा करने में असफल रहने के साथ भ्रष्टाचार और अक्षमता की गर्त में डूबती जा रही है। इसके चलते पावर, स्टील और दूसरे सेक्टरों को कोयले की आपूर्ति बाधित हो रही है।

विज्ञापन


मजबूरन इन्हें अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए विदेशों से कोयले का आयात करना पड़ा रहा है, जिससे लागत में बढ़ोतरी हो रही है। ऐसे में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली नई सरकार का जोर इस समस्या को प्राथमिकता के आधार पर सुलझा कर हालात बेहतर बनाने पर है।
विज्ञापन


प्रधानमंत्री द्वारा ऊर्जा और कोयला मंत्रालय के विलय से स्पष्ट संकेत मिलता है कि मोदी सरकार ने कोयला क्षेत्र में निजी क्षेत्र की भागीदारी के विकल्प पर सोचना शुरू कर दिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

चालू खाते घाटा बढ़ने का क्या है कारण?

ministry official against coal india

चालू खाते का घाटा बढ़ने का एक अहम कारण कोयले का आयात बिल था। कोयले का आयात बिल 2013-14 की अवधि में 18-20 अरब डॉलर था।

नए कोयला और ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल को सीआईएल के विनिवेश और उसकी सभी सहायक इकाइयों को स्वायत्त रूप से अलग-अलग काम करने पर विचार करना होगा।

इससे कोयला सेक्टर में प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा पीयूष गोयल को लंबी अवधि में कोयले की कमी को दूर करने के लिए कोल माइनिंग को निजी क्षेत्र द्वारा कॉमर्शियल ऑपरेशन के लिए खोलने पर भी विचार करना होगा।

1.30 लाख करोड़ का कर्ज फंसा हुआ

ministry official against coal india

जानकारी के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गोयल को ऊर्जा और कोयला सेक्टर की कमियों व कमजोरियों को दूर करने का निर्देश दिया है।

ये दोनों सेक्टर एक-दूसरे से संबंधित हैं। फ्यूल लिंकेज न मिलने, भूमि अधिग्रहण में बाधाओं और पर्यावरण मंजूरी मिलने में दिक्कतों के कारण न सिर्फ सरकारी बैंकों का 1.30 लाख करोड़ रुपये का कर्ज फंसा हुआ है, बल्कि बिजली का उत्पादन करने वाली सरकारी कंपनियों को कोयले की पर्याप्त आपूर्ति न हो पाने के कारण देश भी में बिजली की किल्लत पैदा हुई है।

दूसरी ओर कोयल माइनिंग वाले इलाकों में रेल और रोड लिंकेज न होने के कारण उड़ीसा, झारखंड और छत्तीसगढ़ में कोयला निकालने में समस्याएं आ रही हैं।

कोयले की कितनी है मांग?

ministry official against coal india

एक अनुमान के मुताबिक 2014-15 में देश में कोयले की मांग 7.87 करोड़ रहेगी, जबकि कोयले की आपूर्ति 6.44 करोड़ टन है। ऐसे में मांग और आपूर्ति में 1.43 करोड़ टन का अंतर कोयले के महंगे आयात से पूरा किया जाएगा।

कोयला मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि 2016-17 में स्थिति बेहद खराब हो सकती है, क्योंकि तब तक कोयले की मांग 9.81 करोड़ टन तक पहुंचने का अनुमान है।

उस समय तक कोयले का उत्पादन बढ़कर 7.15 करोड़ टन तक ही पहुंच पाएगा है। ऐसे में कोयले की मांग और आपूर्ति का अंत बढ़कर 2.66 करोड़ टन हो जाएगा।

कोयले की कमी से बिजली उत्पादन प्रभावित

ministry official against coal india

मौजूदा समय में कोयला क्षेत्र में सीआईएल के एकाधिकार का मॉडल आर्थिक रूप से वहनीय नहीं है। यह देश में बिजली उत्पादन को बुरी तरह से प्रभावित करने के साथ कोयले के आयात पर बड़े पैमाने पर विदेश मुद्रा खर्च करने पर मजबूर करेगा।

एक अधिकारी का कहना है कि भारत ऐसे समय में ढांचागत सुविधाओं की कमी वहन नहीं कर सकता है। अर्थव्यवस्था को फिर से पटरी पर लाने और आर्थिक विकास दर को दोबारा 8 से 9 फीसदी पर ले जाने की दिशा में काम कर रहे हैं।

कोयला ‌मंत्रालय का भी होगा निजीकरण?

ministry official against coal india

कोयला मंत्रालय में पहले से ही सेक्टर को खोलने और निजी क्षेत्र को अत्याधुनिक तकनीक की मदद से खानों व खदानों को विकसित करने की अनुमति देने की बात कही जा रही है।

कोयला मंत्रालय लगभग 2 करोड़ टन कोयला निकालने के लिए तोरी-शिवपुर-कथोतिया (हजारी बाग), नार्थ कर्णपुरा कोल फील्ड के लिए बीजी ट्रिपल लाइन (झारखंड) और वैली कोल फील्ड (उड़ीसा) के लिए झारसुगुडा-बारापल्ली बीजी डबल लाइन जैसे अहम लिंक को पूरा करना चाहता है।

ये रेल कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट संभावित कोल फील्ड आईबी वैली, नार्थ कर्णपुरा और मांड-रायगढ़ से कोयला निकालने के लिए जरूरी हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed