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लाख रुपये में मकान बनाने की बाध्यता हटेगी

Wed, 23 Jan 2013 10:59 PM IST
नई दिल्ली/अजीत सिंह
नई दिल्ली/अजीत सिंह Updated Wed, 23 Jan 2013 10:59 PM IST
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million obligation to mend house

सरकार भी मान रही है कि महंगाई के इस दौर में एक लाख रुपये में मकान बनाना संभव नहीं है। बढ़ती निर्माण लागत को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार राजीव आवास योजना के तहत फंडिंग के लिए एक लाख रुपये में मकान बनाने की बाध्यता को खत्म करने जा रही है। आगामी बजट में शहरी गरीबों को लुभाने के लिए सरकार राजीव आवास योजना की खामियों को दूर करने में जुट गई है। इसके लिए योजना की गाइडलाइन को नए सिरे से तैयार किया जा रहा है। सरकार मकानों की वास्तविक लागत के आधार पर सहायता राशि और कर्ज मुहैया कराने का फैसला कर सकती है।

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केंद्रीय आवास एवं शहरी गरीबी उन्मूलन मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि राजीव आवास योजना के तहत सिर्फ एक लाख रुपये तक की निर्माण लागत पर ही वित्तीय सहायता मुहैया कराने का प्रावधान है। लेकिन ज्यादातर परियोजनाओं में मकानों की निर्माण लागत कम से कम तीन-चार लाख रुपये हो जाती है, जिसका बोझ लाभार्थी या राज्य सरकार को वहन करना पड़ता है।
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वित्तीय सहायता की इस बाध्यता के चलते कई राज्य सरकारें राजीव आवास योजना में दिलचस्पी नहीं ले रही हैं। शहरी गरीबों को सरकार मकान की वास्तविक लागत के आधार पर वित्तीय सहायता देने पर विचार कर रही है। मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि राजीव आवास योजना की नई गाइडलाइन बनाई जा रही है और आगामी बजट में इसके नए रूप की घोषणा हो सकती है।
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जयपुर, इंदौर समेत आठ राज्यों में चले राजीव आवास योजना के पायलट प्रोजेक्ट के बाद इसकी कई खामियां सामने आई हैं। इंडो-जर्मन सोशल सर्विस के सिटी मेकर प्रोग्राम के प्रमुख इंदु प्रकाश का कहना है कि शहरों में करीब ढाई करोड़ मकानों की कमी का अनुमान है, जिसमें 99 फीसदी कमी निम्न और कम आय वर्ग के मकानों की है। उनका कहना है कि राजीव आवास योजना में शहरी गरीबों की आवास समस्या हल करने के बजाय उन्हें किराए के मकान देने जैसे उपाय किए जा रहे हैं। इस योजना में कई खामियां हैं और इसकी रूपरेखा शहरी गरीबों के हितों के खिलाफ है।

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