मीट से ज्यादा दूध से बने उत्पादों पर मिलती है सब्सिडी
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मीट एक्सपोर्ट को बढ़ावा देने के मामले को भाजपा के पीएम उम्मीदवार नरेंद्र मोदी भले ही राजनीतिक रंग देने में जुटे हैं, लेकिन सरकारी खर्च के मामले में कृषि, उर्वरक, पशुपालन और डेयरी का पलड़ा भारी है।
उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश की रैलियों में मोदी ने मीट एक्सपोर्ट के लिए दी जा रही सब्सिडी पर जमकर निशाना साधा है। जबकि सच्चाई यह है कि केंद्र सरकार मीट के अलावा 27 अन्य उत्पादों पर भी इस तरह की सब्सिडी दे रही है।
इनमें फल-सब्जियों से लेकर प्रोसेस फूड, फ्लावर और डेयरी प्रोडक्ट्स शामिल हैं। दुग्ध उत्पादों के निर्यात पर प्रति किलोग्राम 100 से 150 रुपये की सब्सिडी है, जबकि मीट पर 70 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से सब्सिडी मिलती है।
निर्यातकों में हुआ भय पैदा!
मीट एक्सपोर्ट पर गरमाई सियासत ने निर्यातकों को चिंता में डाल दिया है। भारतीय निर्यात संगठनों के परिसंघ (फियो) के अध्यक्ष रफीक अहमद का कहना है कि सियासी फायदे के लिए मीट एक्सपोर्ट को निशाना बनाया जा रहा है। इससे निर्यातकों में भय पैदा हो रहा है। जबकि सरकार मीट के अलावा बहुत-से कृषि और डेयरी उत्पादों को भी बढ़ावा दे रही है।
भारत सरकार ने कृषि, दुग्ध और मीट उत्पादों के निर्यात से जुड़ी योजनाओं की जिम्मेदारी वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत काम करने वाली एपीडा को दी है। मीट सहित कुल 28 उत्पादों के निर्यात पर ट्रांसपोर्ट सब्सिडी दी जाती है। मिल्क पाउडर पर सब्सिडी की दर प्रति किलोग्राम 100 रुपये है जबकि चीज पर 170 रुपये सब्सिडी मिलती है। मीट, आईसक्रीम और फ्रेश कट फ्लावर पर प्रति किलोग्राम 70 रुपये की ट्रांसपोर्ट सब्सिडी दी जाती है।
गुजरात में दोगुना हुआ मीट उत्पादन
खाद्य नीति के विशेषज्ञ विराज पटनायक का कहना है कि पिछले दस साल में गुजरात में ही मीट उत्पादन दोगुना बढ़ गया है। इस दौरान भारत का कुल मीट उत्पादन करीब डेढ़ गुना बढ़ा है। यह महज भ्रम है कि भारत शाकाहारी लोगों का देश है।