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नए कारोबारियों को बैंक लोन मिलना और मुश्किल

Tue, 29 Oct 2013 12:40 PM IST
अमर उजाला, दिल्ली
अमर उजाला, दिल्ली Updated Tue, 29 Oct 2013 12:40 PM IST
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micro sector  will not get bank loan easily for business purpose

आर्थिक सुस्ती की वजह से नए कारोबारियों को कर्ज मिलना और मुश्किल हो गया है। खास तौर से छोटी पूंजी के साथ कारोबार शुरू करने वालों को बैंक कर्ज देने में सख्ती बरत रहे है। बैंक ऐसा कर्ज पर बढ़ते जोखिम को देखते हुए कर रहे हैं। अब इस समस्या से निपटने के लिए वित्त मंत्रालय में वित्तीय मामलों के सचिव और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी रोडमैप बनाने की तैयारी में हैं।

नए कारोबारियों को कर्ज

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हाल ही में वित्त मंत्री के साथ सरकारी बैंकों के प्रमुखों की बैठक में यह बात सामने आई है कि बैंक मौजूदा छोटे और मझोले कारोबारियों को तो लक्ष्य से ज्यादा कर्ज दे रहे हैं। पर माइक्रो सेक्टर के तहत आने वाले नए कारोबारियों को कर्ज देने में वह लक्ष्य को पूरा नहीं कर पा रहे हैं।
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छोटे कारोबारियों की संख्या
वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार जून 2013 तक सरकारी बैंकों से छोटे और मझोले कारोबारियों को मिले कर्ज की रफ्तार 26 फीसदी की दर से बढ़ी है। जो कि तय 20 फीसदी के लक्ष्य से ज्यादा है लेकिन आरबीआई द्वारा बैंकों के लिए हर साल नए कर्ज लेने वाले छोटे कारोबारियों की संख्या में 10 फीसदी की बढ़ोतरी के तय लक्ष्य को बैंक पूरा नहीं कर पा रहे हैं।
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इस समस्या को दूर करने के लिए जल्द ही वित्त मंत्रालय में वित्तीय सेवा विभाग के सचिव राजीव टकरू और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक होगी।

मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर में माइक्रो सेक्टर
बैंक ऑफ इंडिया के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अमर उजाला को बताया कि मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर में माइक्रो सेक्टर के तहत वह कारोबारी आते हैं, जिन्होंने प्लांट और मशीनरी में 25 लाख रुपये तक का निवेश किया है। जबकि सर्विस सेक्टर में यह सीमा 10 लाख रुपये हैं। ऐसे में जब हर चीज की लागत बढ़ गई है, इस सीमा में कारोबार शुरू करना मुश्किल है।

जिस वजह से भी नए कारोबारी नहीं मिल रहे हैं।

हाल ही में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्रालय के सचिव की अध्यक्षता में मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर पर गठित समिति ने भी निवेश सीमा बढ़ाने की सिफारिश की है। ऐसे में वित्त मंत्रालय और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्रालय की बैठक में इस समस्या से निपटने का रोडमैप तैयार हो सकता है।

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