{"_id":"ad5a5f06-21d3-11e2-9941-d4ae52bc57c2","slug":"media-entertainment-industry-took-giant-leap","type":"story","status":"publish","title_hn":"मीडिया, मनोरंजन इंडस्ट्री ने लगाई जबरदस्त छलांग","category":{"title":"Business archives","title_hn":"बिज़नेस आर्काइव","slug":"business-archives"}}
मीडिया, मनोरंजन इंडस्ट्री ने लगाई जबरदस्त छलांग
नई दिल्ली/एजेंसी
Updated Mon, 29 Oct 2012 07:49 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बहुमुखी विकास के रास्ते पर अग्रसर भारत में मनोरंजन एवं मीडिया उद्योग सालाना 17 फीसदी की दर से बढ़ रहा है। वर्ष 2016 तक इसके 1.75 लाख करोड़ रुपये पर पहुंचने की संभावना है। भारतीय मनोरंजन एवं मीडिया उद्योग दुनिया के शीर्ष 15 बाजारों में शुमार किया जाता है। चीन, रूस एवं ब्राजील का स्थान भी इसके बाद ही आता है। भारत में इस उद्योग के पांव पसारने में सबसे बड़ा हाथ इंटरनेट का है और अगले दो वर्षों में यह कारोबार के मामले में प्रिंट मीडिया को भी पीछे छोड़ सकता है।
विज्ञापन
भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) और प्राइसवाटरहाउसकूपर्स की भारतीय मीडिया एवं मनोरंजन क्षेत्र पर तैयार एक रिपोर्ट में यह आकलन किए गए हैं। इसके मुताबिक मीडिया एवं मनोरंजन क्षेत्र को विज्ञापनों के जरिए विस्तार की खुराक मिलती है। विज्ञापनों से मिलने वाले राजस्व में टेलीविजन और प्रिंट मीडिया 80 फीसदी की बड़ी हिस्सेदारी लेकर इंटरनेट को काफी पीछे छोड़ चुका है। वैसे इस क्षेत्र को मिलने वाले कुल राजस्व में विज्ञापनों की हिस्सेदारी 35 फीसदी है। हालांकि, अन्य बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के विपरीत देश के जीडीपी में विज्ञापन का हिस्सा महज 0.3 फीसदी ही है।
विज्ञापन
दरअसल, भारत में अब भी मनोरंजन और मीडिया क्षेत्र पर होने वाला खर्च काफी कम है। चीन में मनोरंजन एवं मीडिया क्षेत्र पर प्रति व्यक्ति सालाना खर्च 22 डॉलर और ब्राजील में 65 डॉलर है लेकिन भारत में यह महज 7 डॉलर है। लेकिन खर्च योग्य आय बढ़ने और आर्थिक स्थिरता आने पर आने वाले समय में भारतीय उपभोक्ता द्वारा मनोरंजन पर किए जाने वाला खर्च बढ़ने की पूरी संभावना है।
विज्ञापन
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय मनोरंजन एवं मीडिया उद्योग को 100 अरब डॉलर के कारोबार तक पहुंचाने का लक्ष्य समग्र और केंद्रित दृष्टिकोण से ही हासिल किया जा सकता है। समुचित ढांचा तैयार करने, मजबूत नीतिगत आधार, ब्राडबैंड कनेक्शनों की संख्या में बढ़ोतरी, दर्शकों की अभिरुचियों के आकलन की सटीक प्रणाली और नियामक निगरानी के जरिए इस लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी।
रिपोर्ट के मुताबिक अगर भारतीय मनोरंजन एवं मीडिया जगत 100 अरब डॉलर तक पहुंच जाता है तो उससे बडे़ पैमाने पर रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। इससे भारत को ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित करने में भी मदद मिलेगी। नई तकनीक आने से भी मीडिया क्षेत्र का तेजी से प्रसार होगा। 2011 में भारतीय मनोरंजन एवं मीडिया उद्योग करीब 80 हजार करोड़ रुपये का रहा।