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15 फीसदी बढ़ेगा मीडिया-मनोरंजन इंडस्ट्री का आकार

Tue, 12 Mar 2013 11:52 PM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Tue, 12 Mar 2013 11:52 PM IST
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media & entertainment industry to grow at 11.8 percent in 2013

सरकार की ओर से हाल में आर्थिक सुधार की दिशा में उठाए गए कदमों का सकारात्मक असर आने वाले दिनों में भारतीय मीडिया एवं मनोरंजन इंडस्ट्री पर भी दिखाई देगा। भारतीय मीडिया व मनोरंजन उद्योग 2013 में 11.8 फीसदी की रफ्तार से 917 अरब रुपये तक पहुंच सकता है।

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वहीं, 2017 तक इंडस्ट्री का आकार 15.2 फीसदी की दर से बढ़कर 1,661 अरब रुपये के होने का अनुमान है। फिक्की और केपीएमजी की ओर से जारी इंडियन मीडिया एंड इंटरटेनमेंट इंडस्ट्री रिपोर्ट: 2013 में यह जानकारी सामने आई है।
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डिजिटाइजेशन, क्षेत्रीय मीडिया का विस्तार, आगामी चुनाव, फिल्म सेक्टर की मजबूती और तेजी से बढ़ रहे न्यू मीडिया बिजनेस से पूरी मीडिया एवं मनोरंजन इंडस्ट्री के विकास की रफ्तार को गति मिलेगी।
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2011 में कुल इंडस्ट्री 728 अरब रुपये की थी, जो 2012 में बढ़कर 821 अरब रुपये की हो गई। इस दौरान इंडस्ट्री की विकास दर 12.6 फीसदी दर्ज की गई। हाल ही में किए गए सरकार के नीतिगत फैसले अर्थव्यवस्था में जान फूंकने में काफी सहायक होंगे, जिसका सकारात्मक असर भारतीय मीडिया एवं मनोरंजन उद्योग पर भी पड़ेगा।

केपीएमजी के देश में मीडिया एवं मनोरंजन प्रमुख जेहिल ठक्कर का कहना है कि इंडस्ट्री के लिए 2012 खासकर विज्ञापन के लिहाज से बहुत ही चुनौतीपूर्ण रहा। हालांकि, इंडस्ट्री के कुछ सेक्टरों खासकर फिल्म व न्यू मीडिया की ग्रोथ अच्छी रही। बीते साल इंडस्ट्री के लिए कई महत्वपूर्ण फैसले हुए, जिनमें टीवी डिस्ट्रीब्यूशन में एफडीआई और डिजिटाइजेशन काफी अहम रहे।

इन बदलाव से इंडस्ट्री को स्थिति और मजबूत होगी बेहतर होगी। आने वाले दिनों में मीडिया व मनोरंजन इंडस्ट्री 15 फीसदी की रफ्तार से बढ़ोतरी कर सकती है।

प्रिंट इंडस्ट्री में सुस्ती का दौर
विज्ञापन से कमाई पर सबसे अधिक निर्भर प्रिंट इंडस्ट्री की रफ्तार उम्मीद से भी कम रही। 2012 में प्रिंट इंडस्ट्री का आकार 224 अरब रुपये का रहा। 2011 के मुकाबले इसमें 7.3 फीसदी की तेजी आई, जबकि अनुमान 8.3 फीसदी की वृद्धि दर का था।


2011 में प्रिंट इंडस्ट्री 209 अरब रुपये की थी। जेहिल ठक्कर का कहना है कि प्रिंट इंडस्ट्री विज्ञापन से होने वाली कमाई पर सबसे अधिक निर्भर है और पिछले साल विज्ञापन सेक्टर में नरमी रही। अर्थव्यवस्था का प्रदर्शन खराब रहने से विज्ञापन उद्योग खासा प्रभावित हुआ।

2013 में भी प्रिंट इंडस्ट्री में यही रुझान बना रह सकता है। हालांकि क्षेत्रीय स्तर पर तेजी देखने को मिलेगी।

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