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डीजल कारों के जरिए बढ़ाएंगे बाजार हिस्सेदारी

Wed, 30 Jan 2013 11:47 PM IST
नई दिल्ली/कारोबार डेस्क
नई दिल्ली/कारोबार डेस्क Updated Wed, 30 Jan 2013 11:47 PM IST
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maruti suzuki will increase market share from diesel cars

देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड छोटी कारों और डीजल मॉडलों का उत्पादन बढ़ाकर बाजार में अपनी कम होती हिस्सेदारी का रुख बदलने की रणनीति पर काम कर रही है। अगले एक साल में कंपनी करीब तीन फीसदी हिस्सेदारी बढ़ाने का लक्ष्य लेकर चल रही है। मौजूदा आर्र्थिक हालात में चालू वित्त वर्ष में कारों की कमजोर बिक्री के मुुकाबले आगामी साल में भी कोई भारी तेजी की उम्मीद कंपनी को नहीं दिख रही है।

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कंपनी गुड़गांव में डीजल इंजन उत्पादन शुरू करने के साथ ही गुजरात के अपने संयंत्र पर भी काम तेज करने जा रही है। मारुति और देश में ऑटो उद्योग से जुड़े तमाम पहलुओं पर मारुति सुजुकी के चेयरमैन आरसी भार्गव ने अमर उजाला के सीनियर एडिटर हरवीर सिंह के साथ एक लंबी बातचीत में यह बातें कहीं। पेश है भार्गव के साथ इस बातचीत के मुख्य अंश-
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चालू साल ऑटो उद्योग के लिए बहुत बेहतर नहीं रहा है, आगामी वित्त वर्र्ष (2013-14) में क्या संभावनाएं हैं? साथ ही मारुति के लिए स्थिति कैसी रहेगी?
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आगामी साल में ऑटो उद्योग की संभावनाएं बहुत कुछ फरवरी में पेश होने वाले नए बजट पर निर्भर करेगा। मौजूदा आर्थिक हालात के आधार पर देखें, तो स्थिति बहुत बेहतर नहीं रहेगी। कारों की बिक्री में 12 से 14 फीसदी की सालाना विकास दर की कोई संभावना नहीं दिख रही है। मुझे लगता है कि अगर पांच से छह फीसदी की वृद्धि दर भी हासिल हो जाती है, तो यह काफी ठीक होगा।

मारुति की बिक्री वृद्धि दर भी इसके आसपास ही रहेगी। असल में इस समय एक दो राज्यों को छोड़ दें तो निवेश को लेकर कोई बहुत कुछ नहीं कर रहा है और इसका ऑटो उद्योग पर सीधा असर पड़ता है क्योंकि विकास दर के साथ ही हम कारों की बिक्री को भी जोड़कर देखते हैं।

हाल के कुछ सालों में मारुति की बाजार हिस्सेदारी घटी है, इसे बढ़ाने की आपकी क्या रणनीति है?
इस समय हमारी हिस्सेदारी 40 फीसदी से कम है। इसका बड़ा कारण डीजल कारों की बिक्री में तेजी रही है और हमारे पास डीजल कारों की मांग पूरी करने की क्षमता कम थी। मुझे उम्मीद है कि 2013-14 में हम 40 फीसदी बाजार हिस्सेदारी को हासिल कर लेंगे। इसमें डीजल कारों की बिक्री बढ़ाने की हमारी रणनीति कामयाब होगी। अगले साल हमारी डीजल इंजन क्षमता बढ़ जाएगी। इसका फायदा हमें स्विफ्ट और डिजायर की अधिक बिक्री के रूप में मिलेगा।

अर्टिगा और अल्टो की नई लांचिंग का भी हमें फायदा मिल रहा है। वहीं, हमारी मांग का एक बड़ा हिस्सा ग्रामीण बाजार से आ रहा है वहां बिक्री ठीक है और छोटी कारें वहां ज्यादा बिकती हैं। ऐसे में मुझे उम्मीद है कि हम छह फीसदी की बिक्री वृद्धि दर हासिल कर लेंगे। हमारी बिक्री में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं होने का एक कारण डीजल वाहनों का कम उत्पादन भी रहा है।

सितंबर, 2013 तक हम डेढ़ लाख अतिरिक्त डीजल इंजन बनाने लगेंगे। यह क्षमता हम गुड़गांव के अपने पुराने संयंत्र में ही स्थापित कर रहे हैं। वहीं सितंबर, 2014 में यह क्षमता तीन लाख तक पहुंच जाएगी। फिलहाल हम अपनी उत्पादन क्षमता के अलावा फिएट से भी सालाना एक लाख डीजल इंजन खरीद रहे हैं। गुड़गांव की नई इंजन क्षमता पर करीब 1,200 करोड़ रुपये का निवेश होगा।

इस समय कारों की बिक्री में डीजल और पेट्रोल की क्या हिस्सेदारी है?
करीब 60 फीसदी गाड़ियां डीजल की बिक रही हैं। इसके पीछे जहां पेट्रोल के मुुकाबले डीजल के दाम कम होना है वहीं बेहतर तकनीक के चलते डीजल की गाड़ियों का बेहतर प्रदर्शन भी बड़ा कारण है। हालांकि, इसे खरीदने पर होने वाले अतिरिक्त खर्च का फायदा तभी मिलता है जब उपभोक्ता साल में कम से कम 15,000 से 18,000 किलोमीटर गाड़ी चलाता है।

क्या सरकार आगामी बजट में कारों पर उत्पाद शुल्क में कुछ बदलाव कर सकती है?

मुझे नहीं लगता कि कोई बदलाव उत्पाद शुल्क के मोर्चे पर होगा। असल में सरकार के पास विकल्प काफी सीमित हैं। अगर उत्पाद शुल्क में कमी की जाती है, तो उससे राजस्व में कमी आएगी और इस समय सरकार की राजकोषीय हालत इसकी इजाजत नहीं देती है। इसी तरह अगर कुछ गाड़ियों पर उत्पाद शुल्क बढ़ाया जाता है, तो उससे पहले से ही मांग में कमी का संकट झेल रहे उद्योग के लिए दिक्कतें पैदा होंगी।

ब्याज दरों में कमी करने की स्थिति में कारों की बिक्री बढ़ेगी?
आधा फीसदी या एक फीसदी ब्याज दर कमी से कारों की बिक्री पर कोई बड़ा फर्क नहीं पड़ता है। असल में विकास दर अगर तेज होती है, तो उससे माहौल बदलता है और लोगों की जेब में पैसा आता है। कारों की बिक्री के लिए यह जरूरी है।

सर्विस को लेकर उपभोक्ता काफी संवेदनशील होते हैं और कई बार कार खरीदने का फैसला नेटवर्क व सर्विस की गुणवत्ता पर तय होता है, इस बारे में आप का क्या मानना है?

सर्विस का बहुत बड़ा रोल होता  है। यह हमारी प्राथमिकता है और हर साल हम अपने सर्र्विस प्वाइंट और सेल्स नेटवर्क में इजाफा करते जा रहे हैं। इसके साथ ही हम स्पेयर पार्ट्स पर भी फोकस रखते हैं। हमारी बिक्री का करीब पांच फीसदी हिस्सा स्पेयर्र्स की बिक्री से ही आता है।

नए संयंत्रों को लेकर कंपनी की क्या स्थिति है?
हम गुजरात में नया संयंत्र लगा रहे हैं। इसमें 2015-16 में व्यावसायिक उत्पादन शुरू हो जाएगा। यहां हमारे पास दो जगह जमीन है। जिस जगह हम पहला संयंत्र लगा रहे हैं, वहां एक-एक कर तीन संयंत्र स्थापित करने की क्षमता है। जिसमें एक की क्षमता ढाई लाख कार सालाना होगी।

क्या मारुति किसी छोटी कार पर काम कर रही है?
अभी भी हम मारुति 800 कार बेच रहे हैं। कोई नई छोटी कार हम नहीं बनाने वाले हैं। खासतौर से नैनो की तरह की छोटी कार में हमारी कोई दिलचस्पी नहीं है।

मानेसर में कर्मचारियों और कंपनी के बीच विवाद को लेकर अभी क्या स्थिति है?
यह पुराना मसला है और अब इस पर हम कोई बात नहीं करना चाहते हैं। अब यह मुुद्दा न्यायालय के विचाराधीन है और हम वहां पर ठीक से काम कर रहे हैं।

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