फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   Business archives ›   many state can not still buses

केंद्र की मदद के बावजूद बसें नहीं खरीद पाए कई राज्य

Fri, 09 Nov 2012 08:22 PM IST
नई दिल्ली/अजीत सिंह
नई दिल्ली/अजीत सिंह Updated Fri, 09 Nov 2012 08:22 PM IST
विज्ञापन
many state can not still buses

उत्तर भारत के ज्यादातर राज्य शहरों में पब्लिक ट्रांसपोर्ट व्यवस्था को सुधारने में नाकाम रहे हैं। जवाहरलाल नेहरु अरबन रिन्यूअल मिशन (जेएनएनयूआरएम) के तहत केंद्र सरकार ने देश के 61 शहरों को बसों की खरीद के लिए सहायता दी है, जिसके एवज में इन शहरों को परिवहन से जुड़ी सुधार करने थे।

विज्ञापन


बिहार, पंजाब और छत्तीसगढ़ जहां बसों की खरीद करने में पिछड़ गए हैं जबकि उत्तर प्रदेश में भी परिवहन सुधार लागू नहीं हो पाएं हैं। केंद्र की सहायता के बावजूद बसें खरीदने में नाकाम राज्यों को अब शहरी विकास मंत्रालय ने फंड नामंजूर करने की चेतावनी दी है।
विज्ञापन


बसों की फंडिंग पर शहरी विकास मंत्रालय की स्टेटस रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश के सात शहरों आगरा, मेरठ, इलाहाबाद, वाराणसी, लखनऊ, कानपुर और मथुरा में केंद्र सरकार की सहायता से 1310 बसें खरीदने की मंजूरी मिली है। इनमें से अधिकांश बसें चलनी शुरू हो गई हैं लेकिन शहरी परिवहन फंड बनाने, पार्किंग नीति में सुधार और बसों के संचालन के लिए विशेष कंपनी (एसपीवी) बनाने के मामले में यूपी के शहर पिछड़ रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


शहरी विकास मंत्रालय को यूपी में अरबन बसों के लिए तय मानकों से ज्यादा ऊंची बसों की खरीद की शिकायतें भी मिली हैं। इन पर मंत्रालय ने जवाब मांगा है।

शहरी विकास के अब तक के सबसे बड़े कार्यक्रम जेएनएनयूआरएम के जरिए शहरों की बदहाल परिवहन व्यवस्था को सुधारने की कोशिशों का पंजाब, बिहार और छत्तीसगढ़ में और भी बुरा हाल है। मंत्रालय की स्टेटस रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर तक पंजाब में अमृतसर के लिए स्वीकृत 150 बसों में से एक भी चलनी शुरू नहीं हुई है। यही हाल बिहार और छत्तीसगढ़ का है।

मंत्रालय के उच्च अधिकारियों का कहना है कि बिहार के लिए केंद्र सरकार ने 125 बसों को मंजूरी दी थी, जिनकी अभी तक खरीद न होने पर केंद्र ने स्वीकृति राशि नामंजूर करने की चेतावनी दी है जबकि उत्तर प्रदेश में तय मानकों से ऊंची बसों की खरीद पर राज्य सरकार से जवाब मांगा गया है।


बसों की फंडिंग की योजना के तहत दस लाख से कम आबादी वाले शहरों में बसों की खरीद का 80 फीसदी खर्च केंद्र सरकार वहन करती है जबकि 10 लाख से 40 लाख के बीच आबादी वाले शहरों में यह सहायता 50 फीसदी और 40 लाख से ज्यादा आबादी वाले महानगरों में 35 फीसदी है। इस तरह देश के प्रमुख 61 शहरों में केंद्र सरकार ने 15260 बसों की खरीद के लिए कुल 4723 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दी गई है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed