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देश को एक लाख करोड़ डॉलर निवेश की जरूरत: पीएम
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 01 Nov 2012 11:26 PM IST
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इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में एक लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर के निवेश की तत्काल जरूरत पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि बढ़ता वित्तीय घाटा इस लक्ष्य की प्राप्ति में सबसे बड़ी रुकावट है। पीएम के अनुसार वित्तीय घाटे को कम करके ही देश में घरेलू और विदेशी निवेश की अड़चनें दूर की जा सकती हैं।
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बृहस्पतिवार को नए मंत्रिमंडल की पहली बैठक में पीएम ने कहा कि वैश्विक स्तर पर मंदी की मार झेल रही
अर्थव्यवस्था को कसने के लिए वित्तीय घाटे को जल्द से जल्द दूर करना जरूरी है। अपने शुरुआती भाषण में उन्होंने पूरे मंत्रिमंडल को सरकार के इसी एजेंडे पर काम करने का निर्देश दिया है।
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मनमोहन ने कहा कि ईंधन आपूर्ति की पुख्ता व्यवस्था, सुरक्षा, पर्यावरण मंजूरी की समस्या और भुगतान की दिक्कतें भी मुंह बाएं खड़ी हैं, लेकिन फिलहाल वित्तीय घाटे को कम करने पर खास तवज्जो देने की जरूरत है।
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इंडिया अगेंस्ट करप्शन के अरविंद केजरीवाल और विपक्ष की ओर से हो रहे हमलों के बीच प्रधानमंत्री ने मंत्रियों से कहा कि यूपीए सरकार ने पिछले नौ साल में सामाजिक और आर्थिक क्षेत्र में कई बड़े काम किए हैं। मनरेगा, आधार कार्ड और आर्थिक मजबूती का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात से हतोत्साहित होने की जरूरत नहीं है, जरूरत है कि वैश्विक आर्थिक मंदी के असर को दूर करने के लिए सभी मंत्री अपनी कोशिशों को दोगुना कर दें।
प्रधानमंत्री ने मंत्रियों का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि पिछली उपलब्धियों पर गर्व रखें लेकिन यह भी समझें कि देश दुनिया भर में व्याप्त आर्थिक मंदी की मार झेल रहा है जिसका उपाय खुद ही निकालना होगा। इसी मंदी की वजह से देश के आर्थिक विकास में कमी आई, निर्यात घटा और वित्तीय घाटे का फर्क तेजी से बढ़ने लगा है।
मनमोहन सिंह ने कहा कि इस हालात का असर बैठक में मौजूद सरकार के सभी मंत्रियों के मंत्रालयों और विभागों पर पड़ रहा है। जरूरत है कि सभी मंत्री इस हालात को समझते हुए ऐसे फैसले लें ताकि निवेश का रास्ता सुगम हो सके।