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त्योहारों से पहले सरकार का ‘चुनावी’ ऑफर

Thu, 03 Oct 2013 08:08 PM IST
अमर उजाला, दिल्ली
अमर उजाला, दिल्ली Updated Thu, 03 Oct 2013 08:08 PM IST
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manmohan government election offer before festival

भले ही रिजर्व बैंक अभी महंगाई को देखते हुए कर्ज सस्ता करने के पक्ष में नहीं है लेकिन सरकार ने आगामी चुनावों को देखते हुए मध्यम वर्ग को लुभाने का रास्ता निकाल लिया है।

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सरकार अब सरकारी बैंकों को दुपहिया वाहन, एलसीडी, रेफ्रीजरेटर, एयरकंडीशनर आदि उत्पादों के लिए अपने खजाने से अतिरिक्त पूंजी देने जा रही है। जिससे कि बैंक इन उत्पादों के लिए न केवल सस्ती दर पर कर्ज दे सकें, बल्कि ज्यादा से ज्यादा कर्ज भी उपलब्ध करा सकें।
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सरकार इन कदमों से जहां मध्यम वर्ग को खुश करना चाहती है, वहीं सुस्ती से जूझ रहे ऑटोमोबाइल और कंज्यूमर ड्यूरेबल सेक्टर में भी जान फूंकना चाह रही है।

सरकार का यह कदम खासतौर से एलसीडी, रेफ्रीजरेटर और मोबाइल बनाने वाली कंपनियों को खासा राहत देगा।

ऐसा इसलिए है कि हाल ही में आरबीआई ने बैंकों को जीरो फीसदी फाइनेंस स्कीम के जरिए कर्ज देने पर रोक लगा दी है। जो कि त्योहारों के दौरान बिना ब्याज दिए कर्ज लेकर खरीदारी का एक प्रमुख जरिया ग्राहकों के लिए बनता जा रहा था।
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वित्त मंत्रालय द्वारा जारी सूचना के अनुसार सरकार के इस कदम से न केवल मध्यम वर्ग को फायदा होगा, बल्कि इंडस्ट्री को भी उत्पादन बढ़ाने, नए रोजगार सृजन करने का मौका मिलेगा।

इसके पहले बृहस्पतिवार को आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन, वित्त मंत्रालय में आर्थिक मामलों के सचिव अरविंद मायाराम के साथ वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने बैठक की।

इसके तहत वित्त मंत्रालय और आरबीआई ने मिलकर सरकारी बैंकों को अतिरिक्त पूंजी देने का फैसला किया है।

क्यों पड़ी जरूरत

बिक्री में गिरावट जारी
ताजा आंकड़ों के अनुसार अप्रैल से जुलाई के दौरान कंज्यूमर ड्यूरेबल उत्पादों की बिक्री में 12 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। जबकि दुपहिया वाहनों की बिक्री अप्रैल से अगस्त के दौरान केवल 0.72 फीसदी की दर से बढ़ी है।

बैंक त्योहारों में ऑफर देने के मूड में नहीं
हाल ही में आरबीआई द्वारा रेपो रेट में बढ़ोतरी के बाद त्योहारों में सस्ते कर्ज की उम्मीद खत्म हो गई थी। बैंक आगामी त्योहारों के दौरान ब्याज दरों में छूट वाली स्कीम भी लाने के प्रति उत्साहित नहीं थे।

साथ ही आरबीआई ने भी जीरो फीसदी फाइनेंस स्कीम को खत्म करने के निर्देश बैंकों को दे दिए थे, जिसे देखते हुए सरकार ने मध्यम वर्ग को लुभाने के लिए सरकारी बैंकों को अतिरिक्त पूंजी देने का फैसला किया है।

कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन के प्रति रुख फीका
देश के ज्यादातर सरकारी बैंक एलसीडी, रेफ्रीजरेटर, मोबाइल आदि के लिए कर्ज देने में आक्रामक रवैया नहीं अपनाते हैं। वह पर्सनल लोन के तहत इस तरह के कर्ज देते हैं। साथ ही ब्याज दर भी औसतन 16-18 फीसदी होती है।

वित्त मंत्री बैंकों के साथ बैठक जल्द
दोपहिया वाहन और एलसीडी, रेफ्रीजरेटर आदि को सस्ता कर्ज मुहैया कराने के लिए वित्त मंत्री पी. चिदंबरम सरकारी बैंकों के साथ जल्द ही बैठक करेंगे।

सूत्रों के अनुसार इस बैठक के जरिए वित्त मंत्री बैंकों को इस बात के लिए राजी करने की कवायद करेंगे कि वह कुछ खास सेक्टर को कर्ज सस्ती दर पर मुहैया कराएं। जिससे कि अर्थव्यवस्था में तेजी आए।

वित्त मंत्री पी. चिदंबरम इसके पहले भी इस तरह की कवायद कर चुके हैं। खास तौर पर पिछले साल त्योहारी मौसम के पहले उन्होंने बैंकों को कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन देने में तेजी लाने को कहा था।


इस बार चूंकि सरकार बैंकों को इसके लिए अतिरिक्त पूंजी मुहैया करा रही है, जिसे देखते हुए बैंक वित्त मंत्री के निर्देशों को ज्यादा तेजी से अमल करते नजर आ सकते हैं।

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