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इस बार 65 फीसदी तक चढ़ सकते हैं आम के दाम

Tue, 21 Apr 2015 09:29 PM IST
नई दिल्ली/ ब्यूरो
नई दिल्ली/ ब्यूरो Updated Tue, 21 Apr 2015 09:29 PM IST
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Mango has become very pricey- selling tag up by 65% thanks to rains: ASSOCHAM

बे मौसम बारिश से फसलों को हुए नुकसान के चलते आम के भाव इस बार काफी महंगे रहने की बात एसोचैम ने अपने एक अध्ययन में कही है। रिपोर्ट के मुताबिक इस साल आम की साधारण व निचले दर्जे की किस्में जहां 100 रुपये प्रति किलोग्राम तक जा सकती हैं, वहीं मुंबई में अलफांसो (हापुस) आम के दाम 500 से 600 रुपये प्रति दर्जन तक रह सकते हैं। असमय हुई बारिश के चलते आम की करीब 50 फीसदी तक फसल खराब होने को इसकी वजह बताया गया है।

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एसोचैम की एग्री रिसर्च विंग की ओर से मैंगो-एंग्जाइटी ऑन प्रोडक्शन एंड एक्सपोर्ट फ्रंट शीर्षक से तैयार की गई रिपोर्ट में कहा गया है कि आम के दाम अन्य फलों व सब्जियों की तुलना में 50 से 65 फीसदी अधिक बढ़ सकते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि बेमौसम हुई बारिश किसानों और ग्राहकों दोनों को ही नुकसान पहुंचाने वाली रही। इससे फसल को सबसे ज्यादा नुकसान उत्तर प्रदेश की आम पट्टी में हुआ है। इसमें मलीहाबाद, शाहाबाद, अमरोहा, बुलंद शहर, हरदोई, उन्नाव, बाराबंकी और सहारनपुर जैसे इलाके आते हैं।
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रिपोर्ट में कहा गया है कि आम की खुदरा कीमतों में 50 से 65 फीसदी तक तक बढ़ोतरी का रुझान अभी से दिखाई देने लगा है। कीमतों में यह उछाल फलों की किस्मों पर निर्भर करता है। हालांकि आम की इस साल की फसल अभी बाजार में आना बाकी है, पर अनुमान जताया जा रहा है कि कुल मिलाकर आम की फसल को कम से कम 20 फीसदी का नुकसान तो हुआ ही है।
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उत्तर प्रदेश के कई आम उत्पादक इलाकों में तो यह नुकसान 50 फीसदी तक भी गया है। उत्तर प्रदेश के यह इलाके देश के कुल आम उत्पादन का एक चौथाई तक उत्पन्न करते हैं। फसल को हुए नुकसान के चलते इस साल इन इलाकों का उत्पादन गिरकर 15 लाख टन पर आ जाने के आसार हैं।

महाराष्ट्र और मध्य भारत के आम उत्पादक क्षेत्रों की स्थिति भी कुछ ऐसी ही है। एसोचैम के महासचिव डीएस रावत ने बताया कि कई राज्यों की सरकारों ने फसल को हुए नुकसान के लिए राहत के उपायों और मुआवजे की घोषणा की है, पर यह किसानों की क्षतिपूर्ति के लिए नाकाफी हैं।


उनके मुताबिक देश में होने वाले आम में आंध्र प्रदेश और उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी करीब 50 फीसदी की बैठती है। इसके अलावा कर्नाटक 10 फीसदी, बिहार 7.6 फीसदी उत्पादन करता है। गुजरात भी देश के पांच आम उत्पादक देशों में गिना जाता है।

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