फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   Business archives ›   major cause of economic downturn is decrease infrastructure investment

इन्फ्रा में निवेश घटना आर्थिक सुस्ती की बड़ी वजह

Wed, 27 Feb 2013 11:12 PM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Wed, 27 Feb 2013 11:12 PM IST
विज्ञापन
major cause of economic downturn is decrease infrastructure investment

देश के आधारभूत ढांचे के क्षेत्र (इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर) से जुड़ी परियोजनाओं के लिए निवेश में आ रही कमी सरकार को अर्थव्यवस्था में सुस्ती की एक बड़ी वजह नजर आ रही है।

विज्ञापन


यही वजह है कि संसद में पेश 2012-13 के आर्थिक समीक्षा में वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने इन्फ्रास्ट्रक्चर में निवेश बढ़ाने को एक अहम चुनौती मानते हुए इस दिशा में सरकार की ओर से नीतिगत कदम उठाने की बात कही है। आम बजट पेश करने से महज एक दिन पहले संसद में वित्त मंत्री की यह स्वीकारोक्ति इशारा करती है कि 2013-14 के बजट में इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी कई अहम घोषणाएं सुनने को मिल सकती हैं।
विज्ञापन


आर्थिक समीक्षा पेश करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि देश में निवेश के माहौल को सुधारने के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में काफी ऊंचे स्तर पर निवेश किया जाना जरूरी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार द्वारा हाल ही में गठित निवेश संबंधी कैबिनेट कमेटी (सीआईआई) विभिन्न मंत्रालयों के बीच समन्वय स्थापित करते हुए इन्फ्रा परियोजनाओं को तेजी के साथ स्वीकृति दिलाने का काम बेहतर ढंग से करते हुए इस सेक्टर में निवेश में नई जान फूकने में अहम भूमिका निभाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन


आर्थिक समीक्षा के मुताबिक इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी परियोजनाओं के लिए बैंकों द्वारा दिया जाने वाला कर्ज चालू वित्त वर्ष में घटकर 16.57 फीसदी पर आ गया है, जबकि 2010-11 में यह आंकड़ा 44.60 फीसदी के ऊंचे स्तर पर था। कर्ज में करीब 50 फीसदी की हिस्सेदारी रखने वाले ऊर्जा (पावर) क्षेत्र की विकास दर अक्तूबर-दिसंबर तिमाही में महज 21.58 फीसदी रही, जबकि 2010-11 की समान तिमाही में यह 48.19 फीसदी के स्तर पर थी।

सर्वे के मुताबिक टेलीकॉम क्षेत्र के हालात में काफी गिरावट रही। वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में यह नकारात्मक 0.09 फीसदी पर दर्ज की गई, जबकि 2010-11 की समान तिमाही में यह 76.57 फीसदी की ऊंचाई पर थी। सड़क व राजमार्गों के निर्माण के लिए बैंकों का कर्ज गिरकर 18.11 फीसदी पर आ गया, जबकि इससे पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह 33.27 फीसदी रही थी।

आड़े न आए पर्यावरणीय मंजूरी
पर्यावरण संबंधी मंजूरी की बाधा के चलते सड़क और कोयला क्षेत्र की कई परियोजनाओं के अटके रहने का जिक्र करते हुए समीक्षा में कहा गया है कि इन मामलों को फास्ट ट्रैक आधार पर निपटा कर ही 12वीं पंचवर्षीय योजनाओं के लिए निर्धारित लक्ष्यों को हासिल किया जा पाएगा।

वित्त मंत्री ने बताया कि पर्यावरण मंत्रालय से पांच हेक्टेयर क्षेत्र से कम की परियोजनाओं को पर्यावरणीय मंजूरी के दायरे से मुक्त रखने की बात कही गई है। साथ ही सड़क और राजमार्ग की परियोजनाओं के लिए भूमि और मृदा (मिट्टी) संबंधी पर्यावरणीय मंजूरी लेने पर जोर न देने की बात भी कही गई है, ताकि देश में सड़कों के नेटवर्क का तेजी से विस्तार किया जा सके।


लेट-लतीफी का शिकार हुईं 258 परियोजनाएं
इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर की 150 करोड़ रुपये से ऊपर के खर्च वाली कुल 566 परियोजनाओं में से 258 प्रोजेक्टों के काम में देरी हुई है। केवल पांच परियोजनाएं ही अपने तयशुदा वक्त से आगे रही हैं। परियोजनाओं में यह देरी बाजार के खराब हालात और इन्फ्रा परियोजनाओं का काम कर रही कंपनियों को बाजार से पूंजी हासिल करने में दिक्कत के चलते हुई।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed