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केरल के बाजार मे पहुंचे ‘मेड इन चाइना’ ताबूत

Wed, 26 Sep 2012 10:54 AM IST
तिरुअनंतपुरम/एजेंसी
तिरुअनंतपुरम/एजेंसी Updated Wed, 26 Sep 2012 10:54 AM IST
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made in china coffin arrived in kerala
भारतीय बाजार में चीन में बने उत्पादों की तमाम किस्में आपने देखी और आजमाई होंगी, लेकिन अब चीन में निर्मित ताबूत भी यहां पहुंच चुके हैं। बीते दो दशक में विश्व बाजार की उदार नीतियों ने चीनी सामान के लिए दरवाजे खोले हैं, जिनसे देश में ताबूत पहली बार आए हैं। केरल के अलप्पुझा जिले में एक स्थानीय कंपनी ने शंघाई की फर्म के साथ अनुबंध किया है, जिसके तहत 170 ताबूतों की पहली खेप आई है।
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ताबूत आयात करने वाली कंपनी के प्रोपराइटर सतीश थॉमस के अनुसार, ‘हमने शंघाई की कंपनी के साथ ताबूत निर्माण में टाई-अप किया है।’ इन ताबूतों को नाम दिया गया है-स्वर्ग पेटी। चीन में पाए जाने वाले ‘ड्रेगन ट्री’ की लकड़ी से ये ताबूत बने हैं। चीन के पहाड़ी और ठंडे इलाकों में ये पेड़ बहुतायत में पाए जाते हैं। थॉमस ने बताया, ‘इस पेड़ की लकड़ी पर्यावरण अनुकूल होती है और जमीन के भीतर जल्दी ही नष्ट हो जाती है। लगभग एक सप्ताह में।’
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थॉमस के अनुसार इन ताबूतों की कीमत 2000 रुपये से लेकर दो लाख रुपये तक है। उन्होंने कहा, ‘आने वाले समय में हम कुछ और ताबूत मंगाने की योजना बना रहे हैं। साथ ही हमारी कोशिश है कि ताबूत तैयार करने का कच्चा माल चीन से मंगाएं और इन्हें यहीं तैयार कर लें। ऐसे में इनकी कीमत और कम हो जाएगी तथा ये आम आदमी की पहुंच में होंगे।’
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थॉमस ने कहा कि लकड़ी की कमी और ताबूत बनाने के लिए कुशल कारीगरों के अभाव में राज्य में ताबूतों की कमी अक्सर देखी गई है। इसे दूर करने के लिए ही चीन से ताबूत मंगाने का फैसला किया गया। उन्होंने कहा कि आम तौर पर ताबूत बनाने का काम परिवारों में पारंपरिक रूप से होता रहा है, लेकिन इससे जुड़ी नकारात्मक छवि के कारण नई पीढ़ी इससे जुड़ने से इंकार कर रही है।


उन्होंने बताया कि चीन में कार्डबोर्ड (गत्ते) से बने ताबूत लोकप्रिय हैं, लेकिन भारतीय संस्कृति और जनमानस में इनकी जगह नहीं है। हालांकि ये लकड़ी से ताबूतों के मुकाबले काफी किफायती होते हैं।
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