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सैलरी कम होने से घ्ाट गई लोगों की बचत
अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Mon, 18 Nov 2013 10:55 AM IST
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खाने-पीने और जरूरी चीजों की बढ़ती कीमतों, ईंधन खर्च, शिक्षा के खर्च के बढ़ते खर्च और स्वास्थ्य बीमे के प्रीमियम में बढ़ोतरी की चौतरफा मार का देश के मध्य वर्ग की बचत पर काफी बुरा असर पड़ा है।
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औद्योगिक संगठन एसोचैम के एक सर्वे के मुताबिक तेजी से बढ़ती महंगाई के चलते पिछले तीन साल में मध्य वर्ग की बचत में करीब 40 फीसदी की कमी आई है।
सर्वे के मध्य वर्ग रोजमर्रा की जरूरतें तो पूरी कर ले रहा है, पर बढ़ती कीमतों ने उसकी क्रय शक्ति को घटा दिया है। इसके चलते बचत में भी गिरावट आई है। सर्वे के मुताबिक घरेलू खर्च बढ़ने के चलते मध्य वर्ग द्वारा बैंकों व नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों (एनबीएफसी), बांड, डिबेंचर व शेयरों में निवेश काफी कम हो गया है।
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देश के मेट्रो शहरों में रहने वाले हर चार में एक परिवार का कमाने वाला व्यक्ति आमदनी बढ़ाने के लिए ज्यादा वेतन वाली नौकरी तलाशने के साथ-साथ ओवर टाइम और पार्ट टाइम आधार पर कुछ दूसरा काम करने के विकल्प भी तलाश रहा है।
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दूसरी ओर महंगाई ने कंपनियों की मुश्किलें भी बढ़ा दी हैं। इसके चलते एक ओर जहां उनकी लागत (इनपुट कॉस्ट) बढ़ गई है, वहीं कर्मचारियों को महंगाई के अनुरूप ज्यादा वेतन वृद्धि देने का दबाव भी उन्हें झेलना पड़ रहा है।
सर्वे में 82 फीसदी लोगों ने बीते वर्ष मिली वेतन वृद्धि को महंगाई के हिसाब से नाकाफी बताया है। इसके अलावा 82 फीसदी लोगों का मानना है कि उनकी आर्थिक स्थिति बिगड़ गई है, जिससे जीवन स्तर में गिरावट आई है।