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कोल ब्लॉक रद्द होने से 12,000 मेगावाट बिजली उत्पादन होगा प्रभावित
नई दिल्ली /सुजय मेहदूदिया
Updated Fri, 10 Oct 2014 07:20 PM IST
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कोयला मंत्रालय सुप्रीम कोर्ट द्वारा रद्द किए गए कोयला ब्लॉकों की नीलामी के लिए एक पारदर्शी एवं प्रभावी नीति लागू करने में पिछड़ रहा है।
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वहीं अनुमान है कि हाल में रद्द किए गए 214 कोल ब्लॉकों की वजह से 2014-17 की अवधि में कैप्टिव माइन्स से 10 करोड़ टन कोयला उत्पादन का नुकसान होगा और कोयले की कमी से 5,000 से 12,000 मेगावॉट बिजली का उत्पादन नहीं हो पाएगा।
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कैप्टिव कोल ब्लॉकों की उत्पादन क्षमताओं और आर्थिक प्रभावों के बारे में केद्र सरकार द्वारा तैयार किए गए एक आंतरिक नोट के अनुसार हाल में सुप्रीम कोर्ट द्वारा बड़े पैमाने पर रद्द किए गए कोल ब्लॉकों के प्रभाव को आगे की योजना बनाते समय ध्यान में रखा जाना चाहिए ।
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नोट में कहा गया है कि 2016-17 में कैप्टिव कोल ब्लॉकों से 100 एमटी उत्पादन की उम्मीद की गई थी। यह 2016-17 में अनुमानित कुल कोल उत्पादन का लगभग 12.6 फीसदी होगा वहीं 2013-14 में अनुमानित कुल उत्पादन का 7 फीसदी होने की उम्मीद की गई थी।
यह भी अहम है कि 2011-12 में कोयला उत्पादन 540 एमटी से बढ़ कर 2016-17 में 795 मीट्रिक टन होने का अनुमान लगाया गया था।
कोयले की किल्लत को दूर करने के लिए कैप्टिव इस्तेमाल के लिए कोल ब्लॉकों का जल्द से जल्द आवंटन के महत्व पर जोर देते हुए नोट में कहा गया है कि कैप्टिव कोल उत्पादन में गिरावट के परिणामस्वरूप कोयला आयात में वृद्धि होगी।
2013-14 में आयात 168 एमटी था और कैप्टिव ब्लॉकों से उत्पादन 39.9 एमटी था। अगर 2013-14 में कैप्टिव कोल ब्लॉकोें से 39.9 एमटी उत्पादन उपलब्ध नहीं होता तो आयात और ज्यादा बढ़ गया होता।
सरकारी हलकों में यह माना जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा कोल ब्लॉकों को रद्द किए जाने से न सिर्फ देश में कोयला उत्पादन प्रभावित होगा बल्कि इस पर निर्भर सेक्टर जैसे पावर और सीमेंट पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
नोट में दावा किया गया है कि 12 वीं योजना के 2016-17 तक 46 कैप्टिव कोल ब्लॉकों द्वारा उत्पादन शुरू करने और 60 एमटी कोयला उत्पादन करने की उम्मीद की गई थी।
नोट में कहा गया है कि यह 60 एमटी उत्पादन से 2012-13 और 2013-14 में लगभग 5,500 मेगावाट बिजली उत्पादन और 2016-17 में 12,000 मेगावाट बिजली उत्पादन को समर्थन मिलता। इसके अलावा कोल ब्लॉक रद्द होने से आर्थिक गतिविधियों में गिरावट आएगी, क्योंकि क्योंकि कोयले की मांग बिजली, स्टील और सीमेंट की मांग से पैदा होती है।
ऊर्जा एवं कोयला मंत्री पीयूष गोयल सुप्रीम कोर्ट द्वारा 1993 के बाद आवंटित सभी कोल ब्लॉकों को रद्द किए जाने के बाद आगे के रास्ते को अंतिम रूप देने के लिए सभी संभावित विकल्प तलाशने के लिए अंतर-मंत्रालयी समिति (आईएमसी) का गठन कर चुके हैं। समिति को 30 अक्तूबर तक अपनी रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है।