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एफडीआई से देसी लड़ाई लड़ेगा ‘अपना बाजार’
बृजेश दुबे/आगरा
Updated Sat, 22 Sep 2012 09:28 AM IST
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खुदरा बाजार में विदेशी निवेश को लेकर भले ही अधिसूचना जारी हो गई है लेकिन किसानों और उपभोक्ताओं को एफडीआई से लड़ने के लिए देसी हथियार मिल रहा है। किसान उपभोक्ताओं को सीधे उत्पाद ही नहीं बेच सकेंगे बल्कि उनको बता भी सकेंगे कि उत्पाद की ग्रेडिंग क्या है। वहीं बड़ी कंपनियों की तरह अपने उत्पादों की पैकेजिंग भी करा सकेंगे।
एफडीआई से लड़ाई के लिए किसानों को यह देशी हथियार राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद उपलब्ध करा रही है। मंडी परिषद प्रदेश के हर जिले के नगरीय क्षेत्र और प्रमुख बाजारों में ‘अपना बाजार’ विक्रय केंद्र खोलने जा रही है। इस बाजार में किसान उपभोक्ताओं को अपने उत्पादों की फुटकर बिक्री सीधे कर सकेंगे।
यहां केवल सामान बेचने की ही सुविधा नहीं मिलेगी बल्कि किसान अपने उत्पादों को साफ करा सकेंगे। उत्पाद की गुणवत्ता के अनुसार ग्रेडिंग कराने की भी सुविधा मौजूद होगी। किसान उत्पादों की शार्टिंग और पैकेजिंग भी करा सकेंगे ताकि उपभोक्ताओं को लुभा सकें। किसानों और उपभोक्ताओं के बीच से कमीशन एजेंट, रिटेलर दुकानदारों के हटने से जहां किसानों को उनके उत्पाद की वाजिब कीमत मिलेगी वहीं उपभोक्ताओं को अच्छा और ताजा सामान कम कीमत में मिल सकेगा।
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निदेशक और आयुक्त राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद, राजीव अग्रवाल ने जिलों में ‘अपना बाजार’ की स्थापना करने के लिए दो से दस एकड़ तक की जमीन मांगी है। परिषद की यह योजना परवान चढ़ी तो उपभोक्ता के साथ किसानों को भी फायदा होगा।
लोककला को भी बढ़ावा
‘अपना बाजार’ में लोककला को भी बढ़ावा मिलेगी। बाजारों में सांस्कृतिक कार्यक्रम के प्रदर्शन के लिए अलग जगह होगी वहीं हैंडीक्राफ्ट और हैंडलूम के साथ अन्य वस्तुओं की भी बिक्री हो सकेगी। इसके अलावा खानपान की सुविधा के लिए कैंटीन भी होगी।
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एफडीआई से लड़ाई के लिए किसानों को यह देशी हथियार राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद उपलब्ध करा रही है। मंडी परिषद प्रदेश के हर जिले के नगरीय क्षेत्र और प्रमुख बाजारों में ‘अपना बाजार’ विक्रय केंद्र खोलने जा रही है। इस बाजार में किसान उपभोक्ताओं को अपने उत्पादों की फुटकर बिक्री सीधे कर सकेंगे।
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यहां केवल सामान बेचने की ही सुविधा नहीं मिलेगी बल्कि किसान अपने उत्पादों को साफ करा सकेंगे। उत्पाद की गुणवत्ता के अनुसार ग्रेडिंग कराने की भी सुविधा मौजूद होगी। किसान उत्पादों की शार्टिंग और पैकेजिंग भी करा सकेंगे ताकि उपभोक्ताओं को लुभा सकें। किसानों और उपभोक्ताओं के बीच से कमीशन एजेंट, रिटेलर दुकानदारों के हटने से जहां किसानों को उनके उत्पाद की वाजिब कीमत मिलेगी वहीं उपभोक्ताओं को अच्छा और ताजा सामान कम कीमत में मिल सकेगा।
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निदेशक और आयुक्त राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद, राजीव अग्रवाल ने जिलों में ‘अपना बाजार’ की स्थापना करने के लिए दो से दस एकड़ तक की जमीन मांगी है। परिषद की यह योजना परवान चढ़ी तो उपभोक्ता के साथ किसानों को भी फायदा होगा।
लोककला को भी बढ़ावा
‘अपना बाजार’ में लोककला को भी बढ़ावा मिलेगी। बाजारों में सांस्कृतिक कार्यक्रम के प्रदर्शन के लिए अलग जगह होगी वहीं हैंडीक्राफ्ट और हैंडलूम के साथ अन्य वस्तुओं की भी बिक्री हो सकेगी। इसके अलावा खानपान की सुविधा के लिए कैंटीन भी होगी।