जानिए क्यों महंगा नहीं होगा पेट्रोल-डीजल?
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चुनावी मौसम में पेट्रोल, डीजल पर राजनीति गर्माने का मौका विपक्षी दलों को नहीं मिले इसलिए सरकार चुनाव खत्म होने तक इनकी कीमतों में इजाफा नहीं करेगी।
बेशक डीजल की खुदरा बिक्री पर तेल कंपनियों का नुकसान 5.49 रुपए से बढ़कर 6.80 पैसा प्रति लीटर हो चुका है। लेकिन सरकार ने तेल कंपनियों को दाम बढ़ाने का संकेत नहीं दिया है।
अब ईंधन की कीमतों में इजाफा चुनाव के अंतिम चरण संपन्न होने के बाद होने की संभावना है।
डीजल बिक्री पर नुकसान
पिछले माह भी तेल कंपनियों ने डीजल के दाम नहीं बढ़ाए थे। इस संदर्भ में सरकारी तेल कंपनी के एक प्रमुख अधिकारी ने कहा कि डीजल बिक्री पर नुकसान छह रुपए प्रति लीटर से अधिक होने के बावजूद पेट्रोलियम मंत्रालय ने कीमतों में इजाफे पर कोई बात नहीं की है।
हालांकि किरीट पारिख समिति की सिफारिशों के मुताबिक छह रुपए तक की अंडर रिकवरी का बोझ सरकार वहन कर सकती है। लेकिन इससे अधिक की भरपाई के लिए तेल कंपनियों को कीमत वृद्धि करना चाहिए।
तेल कंपनियों को नुकसान
उल्लेखनीय है कि पिछले माह तेल कंपनियों को डीजल पर 5.49 रुपए प्रति लीटर का नुकसान हो रहा था। जो कि अब 1.31 रुपए प्रति लीटर तक बढ़ गया है।
लेकिन सरकार ने इस संदर्भ में चुप्पी साध रखी है। बताते चले कि पिछले साल जनवरी में कैबिनेट ने यह निर्णय लिया था कि तेल कंपनियां अपने नुकसान की भरपाई के लिए 50 पैसा प्रति लीटर का आंशिक इजाफा कर सकती हैं।
फिलहाल तेल कंपनियों को केरोसिन बिक्री पर 33.85 रुपए प्रति लीटरऔर एलपीजी पर 449.13 रुपए प्रति सिलेंडर का नुकसान हो रहा है।