जानिए चुनाव से कैसे कमाए जाएंगे 800 करोड़ रुपए?
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राजनीतिक दलों के चुनाव प्रबंधन में लगीं सलाहकार कंपनियां तकरीबन 700 से 800 करोड़ रुपये तक की कमाई कर सकती हैं। यह बात कही है एसोचैम ने अपने नए अध्ययन में। अध्ययन में कहा गया है कि वोटरों तक पहुंच बनाने के लिए पार्टियों द्वारा सोशल मीडिया जैसे नए तौर तरीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके लिए पार्टियों ने खास एजेंसियों को चुनाव अभियान का जिम्मा सौंपा है।
1 से 50 लाख रुपए तक की वसूली
एसोचैम सेक्रेटरी जनरल डीएस रावत के मुताबिक, ‘वोट शेयर, जीत का अंतर, वोटों का ध्रुवीकरण और क्षेत्र की जनसंख्या जैसे चुनावी आंकडे़ अब अहम होते जा रहे हैं।
वहीं जीत-हार के आंकड़ों का वैज्ञानिक विश्लेषण पार्टियों की भावी रणनीति को बनाने में मददगार होगी।’ अध्ययन के अनुसार देश में 150 राजनैतिक सलाहकार कंपनियां हैं। ये कंपनियां हरेक लोकसभा सीटों के लिए पार्टिंयों से एक लाख से 50 लाख रुपये तक वसूल रही हैं।
चुनाव प्रचार के नए फंडे
मीडिया प्रबंधन, प्रचार अभियान की योजनाएं, बाजार की नीतियां बनाना, प्रचार-प्रसार के सामानों की डिजाइन करना, वेबसाइट और सोशल मीडिया पेज बनाने से लेकर प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवारों की संभावनाओं को खंगालने तक की सेवाएं ये कंपनियां दे रही हैं।
इनमें सेवाओं में सबसे महत्वपूर्ण है प्रत्याशी का प्रोफाइल बनाना और वोटरों तक उसकी सही छवि पेश करना भी शामिल है। कंपनियों की ये सेवाएं महज मुंबई, दिल्ली, बंगलूरू, अहमदाबाद और कोलकाता जैसे बडे़ शहरों में ही नहीं दी जा रही हैं, बल्कि द्वितीय और तृतीय श्रेणी के शहरों में भी ये सेवाएं ली जा रही हैं।
कंपनियों की अन्य सेवाओं में वोटरों को प्रभावित करने वाले संदेशों, अनुसंधान और पोस्टरों और पर्चों की डिजाइन तैयार करना भी शामिल है।