{"_id":"dc9be8f8-0940-11e2-a185-d4ae52ba91ad","slug":"kingfisher-owes-rs-60-cr-in-service-tax","type":"story","status":"publish","title_hn":"किंगफिशर पर 60 करोड़ से अधिक का सेवा कर बकाया","category":{"title":"Business archives","title_hn":"बिज़नेस आर्काइव","slug":"business-archives"}}
किंगफिशर पर 60 करोड़ से अधिक का सेवा कर बकाया
मुंबई/एजेंसी
Updated Fri, 28 Sep 2012 01:18 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
निजी क्षेत्र की विमानन कंपनी किंगफिशर एयरलाइंस पर सेवा कर का बकाया 60 करोड़ रुपये से ऊपर पहुंच चुका है। मुंबई सर्विस टैक्स कमिश्नर सुशील सोलंकी ने बताया कि किंगफिशर डिफाल्टर बनी हुई है। उस पर सेवा कर का बकाया 60 करोड़ से ऊपर हो गया। कंपनी साप्ताहिक भुगतान करने में विफल रही है और इसके अधिकांश बैंक खाते फ्रीज किए जा चुके हैं।
उन्होंने बताया कि नागरिक विमानन सेक्टर में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की अनुमति के सरकार के फैसले से कर्ज के बोझ से दबी विमानन कंपनियों से बकाया वसूली की एक आस जगी है। बकाए का पूरा भुगतान मुश्किल है और इसका एक ही रास्ता है कि विदेशी भागीदारों के जरिए विमानन कंपनियों में निवेश हो।
सोलंकी ने कहा कि एयर इंडिया का भी विभागीय बकाया 250 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। एयर इंडिया ने विभाग को बताया है कि उसे जल्द ही पूंजी मिलने की उम्मीद है और इसके बाद वह बकाये का भुगतान कर देगी। उन्होंने बताया कि सरकारी विमानन कंपनी के महज कुछ बैंक खाते ही फ्रीज किए गए हैं।
विज्ञापन
विभाग ने किंगफिशर के ज्यादातर बैंक खाते फ्रीज कर दिए हैं, जिससे वह बेहद सीमित संख्या में उड़ानों का परिचालन कर रही है। ऐसे में एयरलाइंस के लिए बकाया भुगतान करना मुश्किल है, क्योंकि नकदी का प्रवाह बिलकुल ठहरा हुआ है। किंगफिशर ने पिछले साल नवंबर से यात्रियों से जुटाए गए सेवा कर को नियमित रूप से जमा नहीं कराया है।
वह लगातार इस राशि का इस्तेमाल अन्य उद्देश्यों के लिए कर रही है। दूसरी ओर, किंगफिशर ने कहा है कि उसकी विदेशी एयरलाइंस कंपनियों के साथ एफडीआई लाने के मुद्दे पर बातचीत चल रही है। इस कदम से किंगफिशर के वित्तीय संकट से बाहर निकलने की उम्मीद बंधी है।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि नागरिक विमानन सेक्टर में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की अनुमति के सरकार के फैसले से कर्ज के बोझ से दबी विमानन कंपनियों से बकाया वसूली की एक आस जगी है। बकाए का पूरा भुगतान मुश्किल है और इसका एक ही रास्ता है कि विदेशी भागीदारों के जरिए विमानन कंपनियों में निवेश हो।
विज्ञापन
सोलंकी ने कहा कि एयर इंडिया का भी विभागीय बकाया 250 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। एयर इंडिया ने विभाग को बताया है कि उसे जल्द ही पूंजी मिलने की उम्मीद है और इसके बाद वह बकाये का भुगतान कर देगी। उन्होंने बताया कि सरकारी विमानन कंपनी के महज कुछ बैंक खाते ही फ्रीज किए गए हैं।
विज्ञापन
विभाग ने किंगफिशर के ज्यादातर बैंक खाते फ्रीज कर दिए हैं, जिससे वह बेहद सीमित संख्या में उड़ानों का परिचालन कर रही है। ऐसे में एयरलाइंस के लिए बकाया भुगतान करना मुश्किल है, क्योंकि नकदी का प्रवाह बिलकुल ठहरा हुआ है। किंगफिशर ने पिछले साल नवंबर से यात्रियों से जुटाए गए सेवा कर को नियमित रूप से जमा नहीं कराया है।
वह लगातार इस राशि का इस्तेमाल अन्य उद्देश्यों के लिए कर रही है। दूसरी ओर, किंगफिशर ने कहा है कि उसकी विदेशी एयरलाइंस कंपनियों के साथ एफडीआई लाने के मुद्दे पर बातचीत चल रही है। इस कदम से किंगफिशर के वित्तीय संकट से बाहर निकलने की उम्मीद बंधी है।