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42 फीसदी पिछड़ चुकी है खरीफ की बुवाई
अजीत सिंह / अमर उजाला दिल्ली
Updated Mon, 07 Jul 2014 09:39 PM IST
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जुलाई के पहले हफ्ते में भी कमजोर मानसून ने मौसम विभाग के अनुमानों पर पानी फेर दिया है। सात जुलाई तक भी देश में बारिश का आंकड़ा सामान्य से 42 फीसदी कम रहा है, जिसके चलते खरीफ की बुवाई पिछड़ती जा रही है। सूखे के बढ़ते खतरे को देखते हुए कृषि मंत्रालय ने नई फसल बीमा योजना को लेकर सक्रिय हो गया है। इस बारे में कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने राज्यों से सुझाव मांगे हैं।
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कृषि मंत्रालय के अनुसार, 4 जुलाई तक 182 लाख हेक्टेअर क्षेत्र में खरीफ की बुवाई हुई है। जबकि पिछले साल इस समय तक 318 लाख हेक्टेअर में खरीफ की बुवाई हो चुकी थी। देश के 45 लाख हेक्टेअर से ज्यादा क्षेत्र में धान की बुवाई हो चुकी है, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 60 लाख हेक्टेअर तक पहुंच गया था। इस साल देश के उत्तर-पश्चिमी और मध्य व पश्चिमी क्षेत्रों में कमजोर मानसून की सबसे ज्यादा मार दलहन और तिलहन की बुवाई पर पड़ी है। चार जुलाई तक सिर्फ 7.5 लाख हेक्टेअर क्षेत्र में दालों की बुवाई हो पाई है, जो पिछले साल के करीब 22 लाख हेक्टेअर के मुकाबले काफी कम है। तिलहन फसलों की बुवाई 14.5 लाख हेक्टेअर तक पहुंची है, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा करीब 62 लाख हेक्टेअर था।
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अल-नीनो की कमजोरी पर टिकी आस
मौसम विभाग ने जुलाई के पहले हफ्ते में मानसून के सक्रिय होने का उम्मीद जताई थी। लेकिन पिछले दो-तीन दिनों में उत्तर-पश्चिमी और मध्य भारत में उम्मीद से काफी कम बारिश हुई है। अब मौसम विभाग की कमजोर पड़ते अल-नीनो प्रभाव पर टिकी है। कृषि आयुक्त जेएस संधू का कहना है कि अब अल-नीनो के कमजोर पडऩे की रिपोर्ट मिल रही हैं। इससे अगस्त और सितंबर में मानसून अच्छा रहने के आसार बढ़ गए हैं।
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