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सबसे ज्यादा टैक्स देकर भी खाली हाथ कानपुर
कानपुर/ब्यूरो
Updated Tue, 19 Feb 2013 10:56 PM IST
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उत्तर प्रदेश सरकार के कुल राजस्व में 10-12 फीसदी हिस्सेदारी रखने वाले औद्योगिक शहर कानपुर के हाथ वित्त वर्ष 2013-14 के बजट में खाली रहे। कानपुर के कारोबारी प्रदेश सरकार के बजट से खासे नाराज हैं। उनका कहना है कि राज्य सरकार को सबसे ज्यादा टैक्स कानपुर से मिलता है और टैक्स कलेक्शन में कानपुर का योगदान 18-20 फीसदी है, लेकिन जब यहां की इंडस्ट्री को सहूलियतें देनी की बात आती है, तो राज्य सरकार के पास कोरे आश्वासनों के अलावा कुछ नहीं होता।
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मर्चेंट चैंबर ऑफ उत्तर प्रदेश के काउंसिल मेंबर सुशील कनोडिया ने बताया कि सरकार को कानपुर की इंडस्ट्री और यहां के विकास से कोई मतलब नहीं है। हमें इस बार बजट से खासी उम्मीदें थीं, लेकिन सरकार ने कानपुर की इंडस्ट्रीज को सिरे से खारिज कर दिया है। सुपरहाउस के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक मुख्तारुल अमीन ने कहा कि जिन क्लस्टर्स में इंडस्ट्रीज नहीं आ रही हैं, सरकार को चाहिए था कि उनमें टैक्स हॉलिडे और दूसरे इनसेंटिव दिए जाएं, ताकि औद्योगिक इकाइयां केवल नोएडा और आसपास के इलाकों तक सीमित न रह जाएं।
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इंडस्ट्री एसोसिएशंस को उम्मीदें थीं कि राज्य सरकार वैट विसंगतियां दूर करने, इंट्री टैक्स खत्म करने, टैक्स हॉलिडे और नई औद्योगिक नीति के संबंध में कोई घोषणा करेगी, लेकिन उन्हें निराशा ही हाथ लगी है। प्रोविंशियल इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के महासचिव अतुल सेठ ने बताया कि उद्यमी पहले से ही बिजली की बढ़ी दरों से परेशान थे और उन्हें बजट में कुछ राहत मिलने की उम्मीद थी, लेकिन उनकी रही-सही उम्मीद भी खत्म हो गई है।
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कानपुर अपनी खोयी औद्योगिक छवि को दोबारा पाना चाहता है, लेकिन सरकार के रवैए को देखते हुए ऐसा होना फिलहाल संभव नहीं दिख रहा है। उन्होंने बताया कि सरकार ने 22,000 करोड़ रुपये के घाटे का बजट पेश किया है। इसका सीधा मतलब है कि आगे चलकर यह कारोबारियों पर टैक्स का बोझ और बढ़ा देगी।
इंडियन इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के क्षेत्रीय प्रबंधक मनमोहन राजपाल ने बताया कि सरकार नए उद्योगों को बढ़ावा देने की बात तो कर रही है, लेकिन इसके लिए कुछ कर नहीं रही है। सरकार ने न तो औद्योगिक इंफ्रास्ट्रक्चर सुधारने की कोशिश की है और न ही नई औद्योगिक नीति को सही तरीके से अमलीजामा पहनाया है। हालांकि, कानपुर की लेदर इंडस्ट्री को थोड़ी राहत मिली है। प्रदेश सरकार ने टेनरियों के दूषित पानी के ट्रीटमेंट, एसटीपी अपग्रेडेशन के लिए 70 करोड़ रुपये का बजट तय किया है।