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फ्लॉप शो रहा डेढ़ लाख करोड़ रुपए का यह मिशन

अजीत सिंह/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 16 Dec 2013 01:31 PM IST
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jnnurm mission flop
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शहरों की सूरत बदलने के लिए शुरू हुआ मिशन सरकार की उपलब्धि बनने के बजाय नाकामी का सबब बनता जा रहा है।
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वर्ष 2005 में शुरू हुआ जवाहरलाल नेहरू नेशनल अर्बन रिन्यूअल मिशन (जेएनएनयूआरएम) वर्ष 2012 तक पूरा होना था, लेकिन तय अवधि गुजरने के डेढ़ साल बाद भी इसके आधे से ज्यादा प्रोजेक्ट अधूरे पड़े हैं।

पिछले 8 साल में मिशन की धीमी प्रगति चुनावी साल में सरकार के रिपोर्ट कार्ड पर भारी पड़ सकती है। विपक्ष दल केंद्र सरकार पर जेएनएनयूआरएम की नाकामी का ढिंढोरा पिटने की तैयारी में जुट गए हैं।


जेएनएनयूआरएम को केंद्र सरकार के शहरी विकास और आवास मंत्रालय के जरिए चलाया जा रहा है। शहरी विकास मंत्रालय से मिली जानकारी के अनुसार, मिशन में अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए मंजूर हुए 549 प्रोजेक्ट में से अभी तक सिर्फ 217 ही पूरे हो पाएं हैं।

इसी तरह छोटे शहरों में बुनियादी ढांचे के विकास की योजना के कुल 806 प्रोजेक्ट में से 410 ही पूरे हुए हैं। इस धीमी प्रगति का ठीकरा सरकार स्थानीय निकायों की क्षमता और परियोजनाओं को मंजूरी मिलने में हुई देरी पर फोड़ रही है, लेकिन विपक्षी सांसद सरकार की इस नाकामी को नजरअंदाज करने के मूड में नहीं हैं।

संसद के मानसून और अब शीतकालीन सत्र में शहरी विकास से जुड़े सबसे ज्यादा सवाल जेएनएनयूआरएम के बारे में ही पूछे जा रहे हैं।

कैग भी अपनी हालिया रिपोर्ट में जेएनएनयूआरएम के जरिए किए जा रहे खर्च पर कई तरह के सवाल खड़े कर चुका है।

राडिया टेप के सामने आने के बाद मिशन के तहत बसों की खरीद भी जांच के घेरे में आ चुकी है। इस शहरी विकास की अब तक की सबसे बड़ी योजना की नाकामी चुनावी साल में सरकार पर भारी पड़ सकती है।

शहरी मामलों के विशेषज्ञ दुनु रॉय का कहना है कि जेएनएनयूआरम की धीमी प्रगति के लिए स्थानीय निकायों की क्षमता नहीं बल्कि परियोजनाओं का गलत चयन जिम्मेदार है।

हरेक शहर के परियोजनाओं का चयन जनता की भागीदारी से होना है, लेकिन इसे नजरअंदाज किया गया।

यूपी, उत्तराखंड और हिमाचल पिछड़े
शहरी विकास मंत्रालय की प्रोग्रेस रिपोर्ट के मुताबिक, जेएनएनयूआरएम को लागू करने के मामले में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश सबसे फिसड्डी साबित हुए हैं।

मिशन के तहत इंफ्रास्ट्रक्चर के सबसे ज्यादा प्रोजेक्ट हासिल करने वाले गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश जैसे राज्य इन्हें लागू करने में भी आगे हैं।

यूपी में जेएनएनयूआरएम के 33 प्रोजेक्ट में से सिर्फ 4 पूरे हुए हैं जबकि उत्तराखंड 14 में से एक प्रोजेक्ट ही पूरा हो पाया है।

हिमाचल के 3 और जम्मू-कश्मीर के 5 में से कोई प्रोजेक्ट पूरा नहीं हुआ है। गुजरात 71 में से 51 प्रोजेक्ट पूरे कर सबसे आगे निकल गया है।

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