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जेट-एतिहाद डील में सरकार की भूमिका पर सवाल
नई दिल्ली/ब्यूरो
Updated Fri, 26 Apr 2013 09:05 AM IST
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जेट और एतिहाद एयरवेज के बीच हुए सौदे में भारत सरकार की भूमिका को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
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आबू धाबी और भारत के बीच उड़ानों की तादाद करीब तीन गुना बढ़ाने के नागर विमानन मंत्रालय के प्रस्ताव को इस सौदे की कामयाबी के पीछे बड़ी वजह माना जा रहा है।
उड़ानों की संख्या में भारी बढ़ोतरी से एतिहाद को भारतीय यात्रियों को अपनी तरफ खींचने में मदद मिलेगी जबकि घाटे से उबरने के लिए जूझ रही सरकारी एयरलाइन एयर इंडिया को नुकसान उठान पड़ सकता है।
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नागर विमानन मंत्री अजित सिंह ने इस सौदे को यात्रियों और एविएशन क्षेत्र के हित में बताते हुए कहा है कि इससे एयरलाइनों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, जिसका फायदा यात्रियों को मिलेगा।
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उनका कहना है कि अगले पांच साल में भारत में हवाई यात्रियों की संख्या 28 लाख से बढ़कर 45 लाख तक पहुंचने का अनुमान है। हवाई सेवाओं में इतने व्यापक विस्तार को कोई भी एयरलाइंस अकेले पूरा नहीं कर सकती है।
यूएई के साथ द्विपक्षीय हवाई समझौते पर उनका कहना है कि इस समझौते का मकसद किसी एक एयरलाइन को फायदा पहुंचाना नहीं है। यात्रियों की संख्या बढ़ने से छोटे शहरों का हवाई संपर्क बढ़ेगा।
गौरतलब है कि आबू धाबी और भारत के बीच प्रति सप्ताह हवाई यात्रियों की संख्या 13 हजार से बढ़ाकर 53 हजार करने का प्रस्ताव है।
उधर, जेट-एतिहाद सौदे पर पहले सही सवाल उठा चुकी नागर विमानन पर संसद की स्थायी समिति अब इस मामले कड़ा रुख अख्तियार कर सकती है।
समिति को जल्द ही अपनी रिपोर्ट संसद में पेश करनी है। माना जा रहा है कि इस रिपोर्ट में समिति सौदे से एयर इंडिया को होने वाले नुकसान का मुद्दा उठाएगी।
इसके अलावा दो कंपनियों के बीच सौदेबाजी में सरकार के नीतिगत फैसलों की भूमिका पर भी सवाल उठ सकते हैं।