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देश में बंजर भूमि पर उगाएंगे रतनजोत

Thu, 06 Nov 2014 08:46 AM IST
नई दिल्ली/ ब्यूरो
नई दिल्ली/ ब्यूरो Updated Thu, 06 Nov 2014 08:46 AM IST
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Jatropha to cultivate on wastelands : Gadkari

देश के विभिन्न राज्यों में फैली हजारों एकड़ बंजर भूमि का उपयोग रतनजोत, करंज, साल, पाम आदि उगाने में किया जाएगा। ऐसा इसलिए ताकि डीजल में मिश्रण के लिए बायो डीजल और खाना बनाने में काम आने वाले खाद्य तेल बनाने के लिए बीज पैदा हो सकें। इसके लिए सरकार एक नीति बना रही है।

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केंद्रीय भूतल परिवहन, राजमार्ग और जहाजरानी के साथ-साथ ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल रहे नितिन गडकरी ने बुधवार को यहां बायो डीजल पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ग्रामीण विकास विभाग एक नीति बना रहा है, जिससे देश भर में फैली बंजर भूमि पर रतनजोत, करंज, साल या इस तरह के अन्य बीज के उत्पादन के लिए पौधे लगाए जाएंगे। इसके लिए कैबिनेट नोट तैयार कर लिया गया है।
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उनका कहना है कि समुद्र तटों के पास खाली जमीन पर पाम की खेती की जाएगी, क्योंकि पाम के लिए वहां की आबोहवा मुफीद है। अन्य बंजर जमीनों, जंगली इलाकों आदि में रतनजोत, करंज, साल आदि के पौधे लगाए जाएंगे। इसके बीज से बायो डीजल बनाया जा सकेगा, जिसका उपयोग डीजल की जगह किया जाएगा।
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गडकरी का कहना है कि सिर्फ एक कदम से कई फायदे होंगे। यदि पाम की खेती सफल रहेगी, तो विदेशों से पाम आयल नहीं मंगाना पड़ेगा। बायो डीजल का उत्पादन बढ़ेगा, तो क्रूड ऑयल पर हमारी निर्भरता घटेगी। इससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी। इस साल में करीब 80,000 करोड़ रुपये के खाद्य तेलों का आयात करना पड़ता है।


गडकरी के मुताबिक यदि यह प्रयोग सफल होता है, तो इससे नक्सलवाद जैसी समस्या से भी निजात मिल सकेगी। क्योंकि तब जंगली इलाकों में रतनजोत, साल आदि की खेती शुरू हो जाएगी। तब वनवासी इसे उगाएंगे, उसी इलाके में बायो डीजल प्लांट लगाए जाएंगे, जहां उन्हें रोजगार मिलेगा। जब उन्हें रोजगार मिलेगा तो वे फिर बंदूक क्यों उठाएंगे, वे देश की मुख्यधारा में शामिल हो जाएंगे।

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