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जीएसटी पर राज्यों के वित्त मंत्रियों से मिलेंगे जेटली

Thu, 11 Dec 2014 09:07 AM IST
नई दिल्ली/ ब्यूरो
नई दिल्ली/ ब्यूरो Updated Thu, 11 Dec 2014 09:07 AM IST
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Jaitley to meet State finance ministers on GST

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) विधेयक संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान ही सदन में पेश करने को लेकर केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली बृहस्पतिवार को राज्यों के वित्त मंत्रियों की अधिकार प्राप्त समिति के साथ बैठक करेंगे। माना जा रहा है कि इस बैठक के दौरान केंद्रीय बिक्री कर (सीएसटी) में राज्यों की क्षतिपूर्ति के मसले पर सहमति बन जाएगी।

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वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि जीएसटी पर राज्यों के अधिकार प्राप्त समिति से बृहस्पतिवार को वित्त मंत्री नॉर्थ ब्लॉक में मिलेंगे। इसके लिए केंद्र की तरफ से सारी तैयारी हो चुकी है कि राज्यों को क्या-क्या मिलेगा। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार जीएसटी के मसले पर सीएसटी में तीन साल की क्षतिपूर्ति की राज्यों की सबसे बड़ी मांग पूरी होने जा रही है।
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राज्यों को इस बात का विश्वास दिलाने के लिए उन्हें 13,000 करोड़ रुपये की किस्त शीघ्र ही जारी हो सकती है। इसका प्रावधान संसद के इसी सत्र में पेश होने वाली अनुदान की पूरक मांग में हो सकता है। अधिकारी ने बताया कि जीएसटी के नवीनतम मसौदे में पेट्रोलियम पदार्थों को राज्यों के मद से हटा कर जीएसटी के दायरे में ला दिया गया है। इस पर कुछ राज्यों की तरफ से इसका विरोध हो सकता है। हालांकि उन्हें शांत करने के लिए जेटली ने अपना पक्ष भी तैयार कर लिया है।
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केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री जयंत सिन्हा के मुताबिक अप्रत्यक्ष कर के क्षेत्र में सुधार जितना जल्द हो सके, हो जाना चाहिए, क्योंकि जीएसटी लागू होने में देरी का खमियाजा भारतीय अर्थव्यवस्था भुगत रही है। उनका कहना है कि जैसे ही राज्य के वित्त मंत्रियों की अधिकार प्राप्त समिति की सहमति मिलेगी, इसके मसौदे के अंतिम रूप दे दिया जाएगा।

केंद्र की तरफ से इसमें तेजी इसलिए दिखाई जा रही है कि अभी संसद का शीतकालीन सत्र चल रहा है। इसी दौरान जीएसटी विधेयक पेश कर दिया जाता है, तो फिर इसके पारित होने में ज्यादा समय नहीं लगेगा। वैसे भी वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इसे आगामी वित्त वर्ष से लागू करने की अपनी मंशा जाहिर कर दी है।

अधिकारियों का कहना है कि अभी तक जीएसटी की राह में रोड़ा अटकाने वाले गुजरात, मध्य प्रदेश जैसे राज्य भी इसके अग्रणी पैरोकार बने हुए हैं। राज्य के वित्त मंत्रियों की अधिकार प्राप्त समिति की पिछली बैठक के दौरान इस सहमति की झलक भी दिखी थी।


अब, जबकि सीएसटी में क्षतिपूर्ति पर राज्यों की पुरानी मांग पूरी हो रही है, तो फिर विरोध का कोई प्रश्न नहीं उठना चाहिए। हालांकि अधिकारियों को इस बात की भी आशंका है कि कुछ कांग्रेस शासित राज्य इसका विरोध कर सकते हैं। हालांकि उन्हें यह भी भरोसा है कि राजनीतिक स्तर पर इसे संभाल लिया जाएगा।

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