'मुद्रा और शेयर बाजार की स्थिरता के लिए वैश्विक सुरक्षा तंत्र हो'
चीन द्वारा अपनी मुद्रा युआन के अवमूल्यन के बाद विश्व भर में आए आर्थिक भूचाल के मद्देनजर भारत ने शनिवार को मुद्रा और बाजार की अस्थिरता को रोकने के लिए वैश्विक सुरक्षा तंत्र की जरूरत पर बल दिया।
जी20 के वित्त मंत्रियों की बैठक में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के अंतर्गत बेहतर डिजाइन वाले और तेजी से इस्तेमाल करने योग्य सुरक्षा प्रणाली की मांगी की। इसके तहत जेटली ने सुझाव दिया कि सदस्य देशों के बीच मल्टीलैटरल स्वैप के जरिए तरलता की व्यवस्था मजबूत करने के उपायों की जरूरत हैं।
जेटली ने कहा, ‘हाल ही में शेयर बाजारों में देखी गई अस्थिरता और मुद्रा की चाल से बाजार में व्याप्त चिंताओं के समाधान के लिए एक वैश्विक सुरक्षा तंत्र की जरूरत है। मेरा मानना है कि अस्थायी, व्यक्तिगत और प्रतिक्रियात्मक उपायों से सिर्फ सीमित अवधि तक प्रतिकूल प्रभावों को रोका जा सकता है। ये उपाय स्थायी समाधान उपलब्ध नहीं करा सकते। यह सिर्फ वैश्विक नीति के जरिए ही संभव हो सकता है।’
वित्त मंत्री ने चीन का नाम नहीं लिया लेकिन उनका इशारा स्पष्ट रूप से आर्थिक सुस्ती के कारण चीन द्वारा मुद्रा का अवमूल्यन करने के बाद भारत सहित वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसके प्रभावों की तरफ था।
कुशल श्रमिकों की सुगम आवाजाही तारीफ-ए-काबिल
जी20 की बैठक में भारत ने वस्तुओं और पूंजी के साथ-साथ कुशल श्रमिकों के आसान आवाजाही बढ़ाने की तरफदारी की। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि इससे विकसित देशों को मदद मिलेगी जहां की जनसंख्या उम्रदराज हो रही है।
उन्होंने कहा, वस्तुओं के आवागमन और पूंजी उदारीकरण के साथ-साथ कुशल श्रमिकों की आसान आवाजाही की दिशा में भी हमारे प्रयास होने चाहिए। इससे उम्रदराज होती जनसंख्या वाले विकसित देशों को खासी मदद मिलेगी।
उल्लेखनीय है कि भारत विकसित देशों में उदार वीजा पद्धति चाहता रहा है ताकि कुशल प्रोफेशनल का आसानी से आना जाना सुनिश्चित किया जा सके। इससे भारत के सेवा सेक्टर के विकास में तेजी आएगी। सेवा सेक्टर का भारत के आर्थिक विकास में लगभग 60 फीसदी का योगदान है।