करदाताओं को टैक्स छूट की सौगात
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वित्त मंत्री अरुण जेटली बृहस्पतिवार को जब मोदी सरकार का पहला बजट पेश कर रहे थे तो शायद उनके दिमाग में चुनाव के दिनों में दिए गए अच्छे दिन के नारे और उन्हें आर्थिक हकीकत में तब्दील करने का सवाल सबसे ऊपर रहा होगा।
यही वजह है कि उनके बजट में करदाताओं और मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर से लेकर विदेशी निवेशकों तक को खुश करने वाले फैसले दिख रहे हैं।
बजट में हर वर्ग का ध्यान रखने की कोशिश करते हुए इसमें महिलाओं, किसानों और युवाओं के लिए भी तमाम घोषणाएं की गई हैं।
इसमें किसानों के लिए कृषि ऋण में बढ़ोतरी से लेकर किसान विकास पत्र फिर शुरू करने की बात है तो महिलाओं की सुरक्षा के लिए भी इंतजाम करने की बात कही गई है। युवाओं के लिए शिक्षा, रोजगार और खेल को बढ़ावा देने के प्रावधान इसमें शामिल हैं।
बजट से गायब थी 'कड़वी गोली'
अचरज की बात यह थी कि मोदी जिस ‘कड़वी गोली’ का जिक्र कर रहे थे वो गायब थी। जेटली ने करदाताओं को बड़ी राहत देते हुए टैक्स छूट की सीमा दो लाख रुपये से बढ़ाकर ढाई लाख रुपये कर दी है।
इसके साथ ही 80सी के तहत निवेश सीमा 50,000 और बढ़ाकर डेढ़ लाख कर दी गई। हाउसिंग लोन के ब्याज पर छूट की सीमा डेढ़ लाख रुपये से बढ़ाकर दो लाख रुपये की गई है।
जेटली ने बजट में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की कई योजनाओं के साथ ही सस्ते मकान मुहैया कराने का भी ऐलान किया है। बजट में रक्षा और बीमा सेक्टर में 49 फीसदी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को मंजूरी दी गई है।
इससे रोजगार में इजाफा होगा। एफडीआई को सरल बनाने के कदमों के साथ ही सड़कों और राजमार्गों के निर्माण को बढ़ावा देने के प्रावधान किए गए हैं।
बजट पर अर्थव्यवस्था की बदहाली की छाप
बजट में अर्थव्यवस्था की बदहाली की छाप साफ दिख रही है। शायद इसलिए कड़वी गोली से परहेज किया गया है। लगता है इसे सात महीने बाद पेश होने वाले दूसरे बजट के बचा कर रखा गया हो।
बजट को देखने पर ऐसा लगता है कि इस पर यूपीए सरकार की स्कीमों का खासा असर है। वित्तीय सेहत सुधारने के किसी रोडमैप के बगैर पेश इस बजट में इन स्कीमों को सिर्फ नए अंदाज में रख दिया गया है।
हालांकि बजट में राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 4.1 फीसदी तक सीमित रखने की महत्वाकांक्षी योजना जरूर है। इस घाटे को 2015-16 में घटा कर 3.6 और फिर 2016-17 में 3 फीसदी तक लाने की उम्मीद भरा लक्ष्य भी मौजूद है। लेकिन देश में सूखे की आशंका सरकार के लिए आगे का रास्ता और कठिन बनाएगी।
सब्सिडी पर मौन हैं जेटली
जेटली इस बात पर मौन हैं कि वह भोजन, फर्टिलाइजर और पेट्रोलियम पर बढ़ती जा रही सब्सिडी को कैसे काबू करेंगे। यह सब्सिडी सरकार के राजस्व का 80 फीसदी खा जाती है। लेकिन यह भी हकीकत है कि बगैर कड़वी दवा के वित्तीय अनुशासन कायम नहीं किया जा सकता है और शायद कुछ अहम राज्यों में चुनावों को देखते हुए अभी इसका इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है।
वित्त मंत्री ने टैक्स कानूनों को सरल और सुविधाजनक बनाने का वादा किया है ताकि निवेशकों के साथ टकराव की स्थिति न हो। बजट में आयकर विभाग की ओर से बेहतर सेवा प्रदान करने के लिए 60 आयकर सेवा केंद्र खोले जाएंगे। छोटी बचत करने वालों के ऐसे राष्ट्रीय बचत पत्र जारी किए जाएंगे, जिनमें इंश्योरेंस कवर भी शामिल होगा।
रक्षा खर्चों में 12.5 फीसदी की बढ़ोतरी करते हुए 2.29 लाख करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। बजट में मौजूदा वित्त वर्ष के दौरान कृषि ऋण के लिए आठ लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। साथ ही इस कर्ज पर अदा किए जाने वाले ब्याज में छूट की स्कीम भी जारी रहेगी।
इन्फ्रास्ट्रक्चर, कंस्ट्रक्शन सेक्टर को सहूलियत
ग्रामीण इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास फंड (आरआईडीएफ) के लिए 25,000 करोड़ रुपये का फंड बनाने का फैसला किया गया गया है। सरकार ने खाद्य सुरक्षा के लिए भारतीय खाद्य निगम के पुनर्गठन की प्रतिबद्धता दोहराई है।
सरकार सार्वजनिक वितरण प्रणाली को दुरुस्त करेगी और आर्थिक तौर पर पिछड़े लोगों को वाजिब कीमत पर गेहूं और चावल मुहैया कराएगी।
विकास को रफ्तार देने और रोजगार पैदा करने के लिए सरकार ने इन्फ्रास्ट्रक्चर और कंस्ट्रक्शन सेक्टर को सहूलियतें देने की घोषणा की है। इसके तहत रियल एस्टेट इनवेस्टमेंट ट्रस्ट और इन्फ्रास्ट्रक्चर इनवेस्टमेंट ट्रस्ट को टैक्स छूट मिलेगी।
मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर के तहत एसएमएसई को प्रोत्साहन देने के लिए प्लांट पर 25 करोड़ निवेश करने वाले निवेशकों को 15 फीसदी निवेश भत्ता मिलेगा। देश में बिजली आपूर्ति की खराब स्थिति को देखते हुए सरकार ने बजट में 31 मई, 2017 बिजली का उत्पादन, ट्रांसमिशन और वितरण शुरू करने वाली कंपनियों को दस साल का टैक्स होलीडे मुहैया कराने की घोषणा की है।