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कच्चे तेल पर फिर लग सकता है आयात शुल्क

Thu, 18 Dec 2014 09:21 AM IST
नई दिल्ली/ सुजय मेहदूदिया
नई दिल्ली/ सुजय मेहदूदिया Updated Thu, 18 Dec 2014 09:21 AM IST
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Jaitley can impose 5 per cent import duty on crude in the budget

भारी गिरावट के चलते पिछले कुछ महीनों के दौरान कच्चे तेल (क्रूड) की कीमतों में 40 फीसदी तक की कमी और सरकार पर पेट्रोलियम सब्सिडी का बोझ घटने के बीच सरकार कच्चे तेल के आयात पर एक बार फिर से 5 फीसदी शुल्क लगा सकती है। वित्त मंत्रालय इसकी संभावनाएं तलाश रहा है। संभव है कि आगामी बजट में वित्त मंत्री यूपीए-2 सरकार के समय में हटाए गए आयात शुल्क को एक बार फिर से लगाने की घोषणा कर दें।

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वित्तमंत्री अरुण जेटली कच्चे तेल की कीमतें पांच साल के सबसे निचले स्तर पर आने और इससे सरकार पर पेट्रोलियम सब्सिडी के बोझ में 70,000 से 80,000 करोड़ रुपये की कमी आने को कच्चे तेल पर एक बार फिर से आयात शुल्क लगाने के अवसर के रूप में देख रहे हैं।
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सब्सिडी में कमी और डीजल के दाम नियंत्रण मुक्त होने तथा पेट्रोल व डीजल उत्पाद शुल्क में दो चरणों में की गई बढ़ोतरी के बाद आगामी बजट में कच्चे तेल के आयात पर शुल्क लगाया जा सकता है। इसे केंद्र की यूपीए-2 सरकार के कार्यकाल में 2011 में तेल की ऊंची कीमतों को देखते हुए हटा दिया गया था। यह उपाय वित्त मंत्री के लिए राजकोषीय घाटे को काबू में लाने के काम को और आसान कर सकता है।
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भारत प्रतिदिन औसतन 40 लाख बैरल कच्चे तेल का आयात करता है और वित्त वर्ष 2014-15 में कुल आयात 88 अरब बैरल रहने की उम्मीद है। इंडियन बास्केट के क्रूड की कीमतें पिछले करीब पांच सप्ताह से 70 डॉलर के आसपास बनी हुई हैं।

तेल की कीमत में नरमी से सरकार के तेल आयात बिल में 18 से 20 अरब डॉलर तक की कमी आ सकती है, जोकि देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के एक फीसदी के करीब है। पिछले वित्त वर्ष में कुल पेट्रोलियम सब्सिडी 1.39 करोड़ रुपये के करीब रही थी, जिसके चालू वित्त वर्ष में घटकर 70,000 करोड़ रुपये या उससे भी कम पर आ जाने की उम्मीद है।

बजट की तैयारियों में जैसे-जैसे तेजी आ रही है, वैसे-वैसे बजट में कच्चे तेल पर पांच फीसदी शुल्क लगाए जाने की संभावना भी जोर पकड़ती जा रही है। आगामी बजट में यह शुल्क लगाए जाने पर सरकार को वित्त वर्ष 2015-16 में 40,000 करोड़ रुपये मिल सकते हैं।

कच्चे तेल की कीमतों में कमी से रिफाइनरियों की लागत में कमी आने का फायदा उठाते हुए मोदी सरकार पहले ही पिछले माह पेट्रोलियम पर उत्पाद शुल्क में दो बार बढ़ोतरी कर चुकी है। उत्पाद शुल्क में किए गए इस इजाफे से चालू वित्त वर्ष में ही सरकार को 15,000 से 20,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय होने की उम्मीद है। इससे वित्त मंत्री जेटली के लिए चालू वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 4.1 फीसदी के दायरे में रखने का लक्ष्य हासिल कर पाना आसान हो सकता है।


जेटली राजकोषीय घाटे को घटाकर वित्त वर्ष 2015-16 में 3.6 फीसदी और 2016-17 में 3 फीसदी के दायरे में लाना चाहते हैं। कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से चालू वित्त वर्ष के दौरान बजट घाटे में 0.5 फीसदी की कमी आने के आसार हैं।

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