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जीएम फूड खाना न खाना अब आपकी मर्जी

Tue, 01 Jan 2013 08:43 PM IST
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो Updated Tue, 01 Jan 2013 08:43 PM IST
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it's your desire to eat genetically modified food

अनुवांशिक रूप से संशोधित (जीएम) खाद्य पदार्थो को खाना न खाना अब उपभोक्ता की मनमर्जी पर होगा। जीएम फूड निर्माता कंपनियों के लिए अपने उत्पादों के पैक पर जीएम फूड की जानकारी देना अनिवार्य होगा। इसके तहत कंपनियों को मंगलवार से जीएम वाले फूड पैक पर बडे़-बड़े अक्षरों में जीएम फूड लिखना होगा। सरकार ने इस आशय का कानून पिछले वर्ष बनाया था। साथ ही सरकार ने कंपनियों को छह महीने का समय दिया गया था ताकि वह पुराने स्टॉक को निकाल सके।

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उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि नए स्टैंडर्ड पैकिंग कानून में खाद्य पैक पर उसकी विस्तृत जानकारी देना अनिवार्य हो गया है। इसके तहत पैक का वजन उसका मूल्य, पैकिंग की तिथि और उसके खत्म होने समय सीमा आदि शामिल हैं।
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इस कानून में पैकिंग (वजन) के नए प्रावधान किए गये हैं। यह एक नवंबर 2012 से लागू हो चुका है। इसी के साथ ही सरकार ने जीएम फूड के पैक पर जीएम लिखना भी अनिवार्य किया था, जिसे एक जनवरी 2013 से लागू कर दिया गया है। इसके तहत जीएम फूड के पैक पर कंपनियों को बड़े शब्दों पर जीएम लिखना होगा।
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दरअसल देश में अभी जीएम फसलों को मंजूरी नहीं मिली है। इसके बावजूद विदेशों से आयातित कई खाद्य पदार्थ जीएम होते हैं। यही नहीं घरेलू स्तर पर गुपचुप रूप से जीएम खाद्य पदार्थों की बिक्री हो रही है। चूंकि विदेशों में जीएम खाद्य पदार्थों की बिक्री पर किसी तरह का प्रतिबंध नहीं है। इसलिए वहां से आयातित कई खाद्य पदार्थ जीएम होते हैं। इसमें ज्यादातर आयातित खाद्य तेल हैं।


इसके अलावा जीएम फसलों से बनी अन्य खाद्य वस्तुएं भी ऐसी हैं, जिनका बड़े पैमाने पर आयात हो रहा है। यह सभी उपभोक्ताओं को उनकी जानकारी के बगैर ही खिलाया जा रहा है। लिहाजा नए प्रावधानों के तहत अब खाद्य पैक पर जीएम की जानकारी देना अनिवार्य होगा। फिर यह उपभोक्ताओं की मर्जी कि वह उसे खरीदे या ना खरीदे।

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