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बैंकों को लेकर गंभीर नहीं मोदी सरकार

Sat, 01 Nov 2014 08:44 AM IST
नई दिल्ली/सुजय मेहदूदिया
नई दिल्ली/सुजय मेहदूदिया Updated Sat, 01 Nov 2014 08:44 AM IST
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Is Modi Government not taking bad loans and NPAs seriously

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 5 नवंबर को जब सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के प्रमुखों को संबोधित करेंगे, तो काफी कुछ ठीक नही होगा। 20 शीर्ष सरकारी बैंक में से आठ बैंकों के प्रमुख मौजूद नहीं होंगे क्योंकि सरकार ने उनकी नियुक्ति टाल दी है। इसके अलावा सरकारी बैंकों के 14 एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर भी नहीं होंगे।

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ऐसे समय में जब बैंक बढ़ते डूबते कर्ज के दबाव में हैं, पंजाब नेशनल बैंक सहित आठ शीर्ष बैंक अगले तीन या चार माह बिना प्रमुखों के रहेंगे। बैंकों के नए सीएमडी की नियुक्ति में समय लगेगा। इसके अलावा केंद्र सरकार ने चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर का पद अलग-अलग करने का इरादा जताया है। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि इन जगहों को भरने के पहले नए दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।
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वित्त मंत्रालय ने व्यय विभाग के सचिव, रिजर्व बैंक के गवर्नर और स्कूल शिक्षा सचिव को मिला कर एक समिति बनाई है। यह समिति सरकारी बैंकों के प्रमुखों के चयन की जांच करेगी। इन बैंकों के प्रमुखों को नियुक्त करने की नई प्रक्रिया तय करने का फैसला किया गया है। ऐसा अस्वस्थ बैकिंग तंत्र को ठीक करने के लिए किया गया है। भविष्य में सरकारी बैंकों के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टरों के साथ एक्जीक्यूटिव डायरेक्टरों के पद नई चयन प्रक्रिया के जरिए भरे जाएंगे।
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प्रधानमंत्री इस पृष्ठभूमि में बैठक को संबोधित करेंगे और शायद यह पहला मौका होगा जब प्रधानमंत्री सरकारी बैंकों के प्रमुखों से बातचीत करेंगे। आम तौर पर वित्त मंत्री यह काम करते रहे हैं। संकेत मिले हैं कि बैठक में डूबत कर्ज की स्थिति सहित बैंकों के परिचालन और वित्तीय प्रदर्शन की समीक्षा की जाएगी। बैठक में वित्त मंत्री अरुण जेटली भी मौजूद होंगे।

माना जा रहा है कि उम्मीदवारों के चयन के लिए नए सिरे आवेदन मंगाने, साक्षात्कार और इसके बाद केंद्रीय सतर्कता आयोग की मंजूरी में कम से कम तीन माह का समय लगेगा। सरकार एक ओर जन धन योजना को शुरू करने में बहुत तेज रही है, वहीं सरकार इन नीतियों को जमीन पर लागू कराने के लिए जिम्मेदार बैंकों के प्रमुखों की नियुक्ति के अहम मुद्दे से पैर पीछे खींच रही है। क्या इसका मतलब है कि मोदी सरकार डूबत कर्ज और खराब कर्ज को लेकर गंभीर नहीं है।

पंजाब नेशनल बैंक के चेयरमैन केआर कामत 27 अक्तूबर को अपना 5 वर्ष का कार्यकाल पूरा चुके हैं और उनके रिटायरमेंट में 13 माह और हैं। वे अपने कार्यकाल की समाप्ति को लेकर निश्चिंत नहीं थे और वे बैंक से पारंपरिक फेयरवेल के बिना ही घर चले गए। उन्हें इस इस बात को लेकर संशय था कि अगले दिन क्या होगा।


वित्त मंत्रालय ने एक बयान जारी कर सीएमडी के आठ और ईडी के 14 पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया रोक दी। पीएनबी को शुक्रवार सुबह वित्त मंत्रालय से एक पत्र मिला। पत्र में नए चेयरमैन की नियुक्ति तक तीन एक्जीक्यूटिव डायरेक्टरों को प्रभार संभालने को कहा गया है।

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