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एक दूसरे से जुड़े बैंकों से बैंकिंग तंत्र को खतरा
नई दिल्ली/ब्यूरो
Updated Tue, 30 Dec 2014 08:52 AM IST
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रिजर्व बैंक ने सोमवार को कहा है कि कुछ बैंकों के आंतरिक तौर पर एक दूसरे से जुड़े होने के कारण एक बैंक में दिक्कत होने पर भारतीय बैकिंग सिस्टम संभावित संचारी जोखिम का सामना कर रहा है।
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यानी एक बैंक में आर्थिक दिक्कत पैदा होने पर समूचे बैकिंग तंत्र पर इसका असर पड़ सकता है। केंद्रीय बैंक ने इस बात पर जोर दिया है कि एक दूसरे के साथ जुड़े होने और संचारी जोखिम के कारण इसकी निगरानी अहम है।
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रिजर्व बैंक की फाइनेंसियल स्टैबिलिटी रिपोर्ट में कहा गया है कि एक दूसरे से जुड़े शीर्ष पांच बैंकों के विश्लेषण से खुलासा हुआ है कि अगर किसी एक बैंक में आर्थिक दिक्कत पैदा होती है तो ज्चाइंट साल्वेंसी-लिक्विडिटी कंडीशन के तहत बैकिंग तंत्र अपनी कुल टियर-1 पूंजी का 50 फीसदी हिस्सा खो सकता है।
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किसी एक बैंक या कई बैंक मेें दिक्कत होने पर संभावित नुकसान का आकलन करने के लिए संचारी विश्लेषण किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि हालांकि ऐसा विश्लेषण काल्पनिक प्रतीत हो सकता है, लेकिन इससे बैंकों की खराब सेहत के बारे में सही संकेत मिलता है।
रिजर्व बैंक का मानना है कि ढांचागत सुधार के कदमों से निवेशकों का भरोसा बढ़ा है और कम होती महंगाई और राजनीतिक निश्चितता को दौर में अर्थव्यवस्था के खतरे भी कम हुए हैं। 2015 में महंगाई दर के आंकड़े 6 फीसदी के स्तर पर रहने का आकलन रिजर्व बैंक ने दिया है।
रिजर्व बैंक ने कहा है कि मार्च 2016 तक बैंकिंग क्षेत्र का एनपीए घटकर 4 फीसदी पर आ सकता है।