बढ़ेगा बीमा एजेंटों का कमीशन
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भारतीय जनता पार्टी के चंदन मित्रा की अगुवाई वाली संसद की सेलेक्ट कमेटी बीमा विधेयक पर अपनी रिपोर्ट अगले माह सरकार को सौंप सकती है।
ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि बीमा विधेयक संसद के शीतकालीन सत्र में पेश किया जाएगा। प्रस्तावित विधेयक में बीमा क्षेत्र के मानकों और काम काज के तौर तरीकों में बदलाव की बात की गई है। इसके अलावा विधेयक में बीमा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की सीमा मौजूदा 26 फीसदी से बढ़ा कर 49 फीसदी करने बीमा एजेंटों कमीशन में वृद्धि का प्रस्ताव भी किया गया है।
संसद की सेलेक्ट कमेटी भारत में बीमा सेक्टर के काम काज पर सरकारी और निजी क्षेत्र की बीमा कंपनियों और दूसरे भागीदारों के साथ पहले ही बातचीत कर ली है। विधेयक में एफडीआई की सीमा बढ़ा कर 49 फीसदी किए जाने के प्रस्ताव से विदेशी निवेशकों के आकर्षित होने की उम्मीद है।
विदेशी निवेशक 26 फीसदी एफडीआई की मौजूदा सीमा को काफी कम बताते हुए लंबे समय से इसे बढ़ाने की मांग कर रहे थे, जिससे विदेशी निवेशक भारत के बीमा क्षेत्र में प्रवेश कर सकें। हालांकि उम्मीद है कि प्रस्तावित विधेयक में यह प्रावधान किया जाएगा कि बीमा कंपनियों में शीष पदों पर भारतीयों को रखा जाए।
नए विधेयक में वितरकों को उत्पाद बेचने के लिए प्रोत्साहन देने का प्रस्ताव भी किया जाएगा। इससे बीमा एजेंटों के कमीशन में वृद्धि हो सकती है। मौजूदा सिस्टम के मुताबिक, एजेंटों का कमीशन वर्ष दर वर्ष अलग होता है। पहले वर्ष का कमीशन सबसे अधिक होता है और दूसरे और तीसरे वर्ष यह गिरता है।
विधेयक में एजेंटों की आय और सततता बढ़ाने के लिए पहले और दूसरे वर्ष स्टैंडर्ड कमीशन लागू करने का प्रस्ताव किया गया है। बीमा कंपनियों ने कहा है कि वे एजेंटों को बनाए रखने में काफी मुश्किलों का सामना कर रहीं हैं।
पिछले तीन- चार वर्षों में पारिश्रमिक मुद्दों की वजह से लगभग 7 लाख एजेंट काम छोड़ चुके हैं। उम्मीद की जा रहा है कि विधेयक में पहले और दूसरे वर्ष के लिए 7 से 8 फीसदी कमीशन का प्रस्ताव किया जाएगा। इसके बाद के वर्षो के लिए कमीशन 1-3 फीसदी होगा।
चंदन मित्रा की अगुवाई में समिति अपनी रिपोर्ट को अंतिम रूप देने और इसे संसद के शीतकालीन सत्र के पहले इसे सरकार को सौंपने के लिए लगातार बैठकें कर रही है। रिपोर्ट अगले माह सौंपे जाने की उम्मीद है। जीवन बीमा कंपनियां और साधारण बीमा कंपनियों दोनों कमेटी के समक्ष अपनी मांग रख चुकी हैं।