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बीमा दावों पर उपभोक्ताओं की बल्ले-बल्ले

Sat, 09 Nov 2013 05:44 PM IST
प्रशांत श्रीवास्तव/अमर उजाला, नई दिल्ली
प्रशांत श्रीवास्तव/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 09 Nov 2013 05:44 PM IST
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Insurance policy clame is easy for customer

यदि आपने हेल्थ इंश्योरेंस के तहत दो या उससे ज्यादा पॉलिसी ले रखी है, तो आपके लिए अब क्लेम लेने की प्रक्रिया कहीं आसान हो गई है।

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अब बीमा कंपनियां क्लेम लेते वक्त आप पर क्लेम राशि को सभी कंपनियों में बराबर रुप से बांटने का दबाव नहीं डाल सकेंगी।

बीमा नियामक विकास प्राधिकरण (इरडा) के अनुसार क्लेम लेने लिए कंपनियों के चयन का अधिकार अब बीमाधारक के पास होगा। यानी वह तय करेगा कि उसे किस कंपनी से क्लेम लेना है।
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साथ ही नए नियमन के तहत ग्राहक को इलाज खर्च ज्यादा होने पर दूसरी पॉलिसी से क्लेम लेने में भी राहत मिली है।

इसे इस तरह समझा जा सकता है कि यदि किसी उपभोक्ता के पास अलग-अलग कंपनियों की दो लाख रूपये और तीन लाख रुपये की हेल्थ पॉलिसी है।

ऐसे में यदि उसका ईलाज खर्च चार लाख रुपये आता है। तो वह अब एक पॉलिसी की पूरी राशि इस्तेमाल करने के बाद दूसरी पॉलिसी की राशि इस्तेमाल कर सकेगा।

अभी तक दो कंपनियों से क्लेम लेने पर बीमाधारक को क्लेम प्रक्रिया अलग-अलग करनी पड़ती थी। जिसमें उसे दोंनो पॉलिसी से बराबर राशि लेना का कंपनियां दबाव डालती थी।
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नए नियमन पर बजाज आलियांज जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड की एवीपी (हेलथ इंश्योरेंस) रेणुका कनविंदे के अनुसार ‘नए नियमन से बीमा धारक को क्लेम लेना जहां आसान होगा, वहीं उसकी इच्छा पर निर्भर होगा कि वह किस कंपनी से क्लेम लेना चाहता है। बीमा कंपनियां उस पर किसी तरह से कंट्रीब्यूटरी क्लॉज का दबाव नहीं डाल सकेंगी’।

क्या होता है कंट्रीब्यूटरी क्लॉज
यदि कोई उपभोक्ता दो या उससे अधिक कंपनियों की बीमा पॉलिसी रखता है, तो पहले कंपनियां ग्राहकों पर क्लेम के समय यह दबाव डाल सकती थी कि वह क्लेम राशि सभी कंपनियों में बराबर से बांटे।

एक अक्टूबर से नए नियमों के बाद अब यह कंट्रीब्यूटरी क्लॉज का विकल्प खत्म हो गया है। अब यह बीमा धारक पर निर्भर है कि वह किस कंपनी से क्लेम लेगा।

ऐसा होने से क्लेम-क्लेम लेने के कई तरह की कागजी कार्रवाई करने से निजात मिलेगी।

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