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फिर उठी सेवा कर प्रणाली में बदलाव की मांग

Sat, 25 Oct 2014 08:24 AM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Sat, 25 Oct 2014 08:24 AM IST
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INFRASTRUCTURE CONSULTANTS  SEEKING CHANGES IN SERVICE TAX REGIME

देश में इंफ्रा परियोजनाओं के कार्यान्वयन के लिए सर्वे, जांच-पड़ताल, डिजाइन व प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करने वाली इंफ्रास्ट्रक्चर कंसल्टिंग इंजीनियरिंग कंपनियों ने वित्त मंत्री अरुण जेटली से सेवा कर प्रणाली की समीक्षा किए जाने की मांग उठाई है। इन कंपनियों ने स्वयं को ठेकेदारों और कंसेशनायर के समान माने जाने का अनुरोध किया है।

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फिक्की की नेशनल कमेटी ऑफ ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर के को-चेयरमैन और अंतरराष्ट्रीय सड़क महासंघ के चेयरमैन केके कपिला ने कहा कि सेवा कर थोपकर कंसल्टिंग इंजीनियरिंग कंपनियों के साथ किए जा रहे भेदभाव के कारण सरकार की वित्तीय मदद वाली इंफ्रा परियोजनाएं अटक रही हैं। इस अहम मुद्दे की जड़ प्वाइंट ऑफ  टैक्सेशन रूल्स 2011 लागू होना और उसके बाद वित्त अधिनियम 2012 में संशोधन होना है। सरकार की वित्तीय मदद वाली इंफ्रा परियोजनाओं के लिए सेवाएं मुहैया करा रही कंसल्टिंग इंजीनियरिंग कंपनियों के लिए वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को लागू करने में भेदभाव हो रहा है।
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उन्होंने कहा कि बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के कार्यान्वयन के लिए ढांचा खड़ा करने वाली, निर्माण, रखरखाव, मरम्मत, बदलाव, पुनर्निर्माण अथवा संरक्षण करने वाली कमोबेश सभी अन्य एजेंसियों जैसे ठेकेदारों एवं कंसेशनायर को सेवा कर के भुगतान से छूट मिली है। लेकिन इंफ्रा परियोजनाओं के समय से पूरा होने के लिए सबसे पहले उन्हें विकसित करने वाली कंसल्टिंग इंजीनियरिंग कंपनियों को ही इस छूट से वंचित रखा गया है।
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कपिला ने कहा कि भेदभाव पूर्ण और अन्यायपूर्ण प्रावधानों के कारण कई सलाहकार कंपनियां कारोबार बंद कर सकती हैं अथवा सेवा कर के भुगतान में डिफाल्ट बन सकती हैं। उन्होंने वित्त मंत्री से सरकारी अथवा स्थानीय प्रशासन की इंफ्रा परियोजनाओं के लिए दूसरी एजेंसियों के समान ही कंसल्टिंग इंजीनियरिंग कंपनियों को भी सरकार की मांग की है।


कपिला ने कहा कि यदि यह सुझाव मानने में कोई दिक्कत है, तो सरकार प्वाइंट ऑफ टैक्सेशन की वह व्यवस्था बहाल कर सकती है, जिसमें सेवा प्राप्त करने वाले अथवा ग्राहक से भुगतान मिलने के 30 दिन के भीतर सलाहकार सेवा कर अदा करते थे। बदलाव का एक अन्य विकल्प सेवा कर को टीडीएस के जरिए वसूलना है।

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