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आम आदमी पर फट सकता है महंगाई बम
अमर उजाला, दिल्ली
Updated Thu, 31 Oct 2013 01:25 AM IST
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महंगाई का तूफान रुकने के बजाय और जोर पकड़ता दिख रहा है। त्योहारों के मौके पर रसोई गैस, डीजल और केरोसिन के दामों में भारी इजाफे की तलवार आम आदमी पर लटक गई है।
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साथ ही सब्सिडी प्राप्त घरेलू रसोई गैस सिलेंडरों की सालाना संख्या कम होने की आशंका भी बढ़ गई है। पेट्रोलियम उत्पादों की कीमत तय करने का फार्मूला निकालने के लिए गठित किरीट पारिख समिति ने बुधवार को पेट्रोलियम मंत्री वीरप्पा मोइली को अपनी रिपोर्ट सौंप दी।
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इस रिपोर्ट में डीजल पांच रुपये तो केरोसिन चार रुपये प्रति लीटर महंगा करने और रसोई गैस के दाम 250 रुपये प्रति सिलेंडर तक बढ़ाने की सिफारिश की गई है।
साथ ही साल में सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडरों की संख्या नौ से घटाकर छह करने को भी कहा गया है। पारिख समिति का मानना है कि इन कदमों से ईंधन सब्सिडी बिल में 72 हजार करोड़ रुपये तक की कटौती संभव है।
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योजना आयोग के पूर्व सदस्य किरीट पारिख की अध्यक्षता वाली इस समिति ने कहा है कि कीमतों में इजाफे के बाद तेल कंपनियों को डीजल पर 6 रुपये प्रति लीटर की तय सब्सिडी मिलनी चाहिए।
इसके अलावा सब्सिडी बोझ को साल भर में धीरे-धीरे खत्म करने की सिफारिश करते हुए डीजल के उत्पादन और खुदरा कीमतों के अंतर का बोझ उपभोक्ताओं पर डालने का सुझाव दिया गया है।
रिपोर्ट में सभी ईंधन की कीमतों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने का प्रस्ताव भी शामिल है। समिति का कहना है कि केरोसिन की बिक्री बाजार मूल्य पर हो और सब्सिडी का लाभ केवल गरीब जरूरतमंद उपभोक्ताओं को नकद सब्सिडी हस्तांतरण प्रक्रिया से मिले। अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की तरह केरोसिन के दाम भी समय-समय पर बढ़ाने की सिफारिश की गई है।
समिति ने रसोई गैस सब्सिडी का बोझ अगले दो साल में खत्म करने के लिए दाम तत्काल 250 रुपये प्रति सिलेंडर बढ़ाने के बाद जरूरत के मुताबिक कीमतों की समीक्षा करने का सुझाव भी दिया है। इसके अलावा डीजल की कीमत तय करने के फार्मूले में कोई बदलाव नहीं करने को भी कहा गया है।
पारिख ने कहा कि अगर समिति की सिफारिशों को लागू किया जाता है तो चालू वित्त वर्ष में 30,250 करोड़ रुपये की ईंधन सब्सिडी को कम किया जा सकता है।
गौरतलब है कि तेल कंपनियां फिलहाल डीजल को बाजार मूल्य से 10.52 रुपये, केरोसिन 38.32 रुपये प्रति लीटर और रसोई गैस 532.86 रुपये प्रति सिलेंडर कम कीमत पर बेच रही हैं। इससे मौजूदा वित्त वर्ष में 1,38,435 करोड़ रुपये के राजस्व के नुकसान की संभावना है।
चुनावी मौसम में जोखिम नहीं लेगी सरकार
पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव सिर पर हैं, ऐसे में केंद्र सरकार के लिए किरीट समिति के सुझावों को मानना आसान नहीं होगा। कीमत वृद्धि पर चुप्पी साधे पेट्रोलियम मंत्री वीरप्पा मोइली ने कहा कि समिति के सुझावों को लागू करने से पहले इनकी समीक्षा की जाएगी।
रिपोर्ट पर वित्त मंत्री पी चिदंबरम से जल्द ही विचार विमर्श किया जाएगा। हालांकि सूत्रों की मानें तो वित्त मंत्रालय समिति की सिफारिश से पूरी तरह सहमत नहीं है। चुनावी मौसम में कीमत वृद्धि की संवेदनशीलता को भांपते हुए सरकार ईंधनों के दाम बढ़ाने का जोखिम नहीं लेना चाहती है।