महंगाई बढ़ाएगी नई सरकार की टेंशन
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बेमौसम बारिश और अल-नीनो के प्रभाव से देश के कुछ हिस्सों में सूखा पड़ने की आशंका और खुदरा मुद्रास्फीति की रफ्तार को देखते हुए केंद्र की नई सरकार के लिए महंगाई पर लगाम लगाना प्रमुख चुनौती होगी।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार पिछले चार महीनों से जारी बेमौसम बारिश के कारण गेहूं और चावल के खुदरा दामों में 10 से 15 फीसदी की बढ़ोतरी हो चुकी है। सब्जियों में भी तेजी देखी जा रही है।
कारोबारियों का कहना है कि चुनावों के कारण सरकार की रबी खरीद प्रक्रिया भी धीमी है। किसानों को अपनी उपज औने-पौने दामों पर व्यापारियों को बेचनी पड़ रही है। आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष एक मई तक 1.85 करोड़ टन की गेहूं खरीद की गई है, जबकि पिछले साल इसी अवधि तक यह आंकड़ा सवा दो करोड़ टन पर पहुंच गया था।
रबी खरीद प्रक्रिया पर असर
मौसम विभाग के अनुसार इस साल मानसून की बारिश सामान्य से पांच प्रतिशत कम रहने की संभावना है। मानसून की कमी का असर खुदरा कारोबार पर नहीं पडे़, इसके लिए प्रशासनिक तैयारी शुरू हो गई है।
राज्य सरकारों को किसानों के लिए डीजल सब्सिडी बढ़ाने की सलाह दी गई है। सूत्रों ने बताया कि ओडिशा, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र पर खास नजर रखी जा रही है।
मानसून की बारिश सामान्य से कम होने की स्थिति में दलहन फसलों की पैदावार में भारी गिरावट आ सकती है, जिससे इनके भावों में उछाल आ सकते हैं।
तेजी से बदलती परिस्थितियों को देखते हुए विश्लेषकों का मानना है कि नई सरकार के सामने भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास को गति देने के लिए आर्थिक सुधारों की ओर तेजी से ध्यान देना होगा।