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महंगाई में राहत, उद्योग से निराशा
ब्यूरो/अमर उजाला, दिल्ली
Updated Thu, 13 Feb 2014 12:20 PM IST
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चुनाव की दहलीज पर खड़ी केंद्र सरकार को महंगाई के मोर्चे पर बड़ी राहत मिली है। खाद्य वस्तुओं की कीमतों में कमी और कच्चे तेल के दाम काबू में रहने से जनवरी में खुदरा महंगाई दो साल में सबसे कम बढ़ी है।
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जनवरी में खुदरा मूल्य सूचकांक (सीपीआई) पर आधारित महंगाई दर 8.79 फीसदी रही, जबकि दिसंबर में यह 9.87 फीसदी थी। पिछले साल जनवरी में भी खुदरा महंगाई 10.79 फीसदी बढ़ी थी।
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केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, जनवरी में ग्रामीण इलाकों में खुदरा महंगाई 9.43 फीसदी और शहरी क्षेत्रों में 8.09 फीसदी बढ़ी। यानी शहरों के मुकाबले ग्रामीण इलाकों में अब भी लोगों पर महंगाई की मार ज्यादा पड़ रही है। खुदरा महंगाई पर काबू पाने में सबसे ज्यादा मदद खाने-पीने की चीजों से मिली है।
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जनवरी में खाने-पीने की चीजों की महंगाई पर 9.9 फीसदी बढ़ी, जबकि पिछले साल जनवरी में खाद्य महंगाई दर 13.36 फीसदी थी। दिसंबर में भी खाने-पीने की चीजों पर 12.16 फीसदी महंगाई थी। जनवरी में ईंधन पर 6.54 फीसदी महंगाई बढ़ी, जबकि कपड़ों और जूतों पर 9.18 फीसदी महंगाई रही।
खुदरा महंगाई की आग थमने से ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद भी जगने लगी है। महंगाई पर काबू पाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक सितंबर से 3 बार ब्याज दरें बढ़ा चुका है। आरबीआई ने जनवरी, 2015 तक खुदरा महंगाई 8 फीसदी से नीचे और जनवरी 2016 तक 6 फीसदी से नीचे लाने को जरूर बताया था। खुदरा महंगाई में आई गिरावट से यह लक्ष्य हासिल करना संभव दिख रहा है।
तेल, चीनी और दालों के दाम गिरे
खुदरा महंगाई से राहत दिलाने में खाद्य तेल, चीनी और दालों की कीमतों में गिरावट अहम साबित हुई है। जनवरी में चीनी के खुदरा दाम 5.51 फीसदी घटे, जबकि तेल एवं वनस्पति की कीमतों में भी 0.35 फीसदी गिरावट आई है।
इस दौरान दालों की कीमतें सिर्फ 2.59 फीसदी बढ़ी है। जनवरी में सब्जियों पर करीब 22 फीसदी, फलों पर 16 फीसदी और दूध व इसके उत्पादों पर करीब 10 फीसदी महंगाई रही। इस तरह जनवरी में खाद्य महंगाई घटकर 9.9 फीसदी पर आ गई है।
अनाज 11 फीसदी महंगा
खुदरा महंगाई में भले ही राहत मिली है, लेकिन अनाज और अंडा, मछली, मांस पर अब भी 11 फीसदी से ज्यादा महंगाई है। जनवरी में अनाज व इसके उत्पादों पर 11.42 फीसदी और अंडा-मछली-मांस पर 11.69 फीसदी महंगाई रही।
मैन्यूफैक्चरिंग में 1.6 फीसदी की गिरावट
औद्योगिक उत्पादन के मोर्चे पर सरकार की मुश्किलें कम होती नजर नहीं आ रही हैं। दिसंबर में लगातार तीसरे महीने औद्योगिक उत्पादन गिरा है। हालांकि, नवंबर के मुकाबले उत्पादन में गिरावट थोड़ी कम हुई है, लेकिन सुस्ती का सिलसिला जारी है।
सरकारी की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, गत दिसंबर में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) 0.6 फीसदी गिरा है। इससे पहले नवंबर में इसमें 1.3 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई थी। सबसे चिंताजनक स्थिति मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र की है। इसका उत्पादन दिसंबर में 1.6 फीसदी गिरा है। इससे पहले नवंबर में भी मैन्युफैक्चरिंग में 3.5 फीसदी की गिरावट आई थी। आईआईपी में सबसे ज्यादा करीब 75 फीसदी महत्व मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र को ही दिया जाता है।
औद्योगिक उत्पादन में गिरावट का सिलसिला अक्तूबर से शुरू हुआ था। इसके चलते चालू वित्त वर्ष (2013-14) में अप्रैल-दिसंबर के दौरान औद्योगिक उत्पादन में 0.1 फीसदी की गिरावट आ चुकी है। वर्ष 2012-13 में इसी अवधि के दौरान औद्योगिक उत्पादन 0.7 फीसदी बढ़ा था। दिसंबर के दौरान बिजली उत्पादन 7.5 फीसदी बढ़ा है।
उपभोक्ता वस्तुओं का उत्पादन 5.3 फीसदी गिरा
औद्योगिक उत्पादन के मोर्चे पर आ रही मुश्किलों को उपभोक्ता वस्तुओं के उत्पादन में आई 5.3 फीसदी गिरावट से समझा जा सकता है। पिछले साल दिसंबर में इसमें 3.6 फीसदी गिरावट आई थी, लेकिन इस साल उत्पादन और ज्यादा गिर चुका है। दिसंबर में कंज्यूमर ड्यूरेबल का उत्पादन तो करीब 16 फीसदी घटा है।