{"_id":"b1bf6010b20844dccef42de635f2c4e7","slug":"inflation-has-no-impact-on-petroleum-consumption","type":"story","status":"publish","title_hn":"पेट्रोल-डीजल की खपत पर महंगाई का कोई असर नहीं","category":{"title":"Business archives","title_hn":"बिज़नेस आर्काइव","slug":"business-archives"}}
पेट्रोल-डीजल की खपत पर महंगाई का कोई असर नहीं
अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Tue, 28 Jan 2014 04:02 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार इजाफे के बावजूद इसके इस्तेमाल में कमी नहीं आई है। महंगाई के बावजूद हाल के दिनों में कुल पेट्रोल की खपत में दुपहिया वाहनों की हिस्सेदारी 61।42 फीसदी और निजी कारों की करीब 35 फीसदी रही है।
विज्ञापन
जबकि ईंधन खपत के ताजा ट्रेंड के मुताबिक 37 फीसदी डीजल का इस्तेमाल व्यवसायिक वाहनों में हो रहा है। वहीं कृषि क्षेत्र में 12 फीसदी से अधिक डीजल का इस्तेमाल हुआ है।
विज्ञापन
एसी नील्सन-ओआरजी एमएआरजी की ओर से किए गए एक सर्वे में यह ट्रेंड उजागर हुआ है। जुलाई 2013 के बाद किए गए इस अध्ययन के मुताबिक निजी इस्तेमाल के अलावा कृषि क्षेत्र और व्यवसायिक वाहनों में डीजल की खपत ज्यादा हो रही है।
विज्ञापन
इसी आधार पर पेट्रोलियम संरक्षण व अनुसंधान संगठन (पीसीआरए) अगले तीन माह में ईंधन बचत के उपायों को पेश करने की योजना बना रहा है। संगठन इस बाबत किसानों और व्यवसायिक वाहन चालकों को विशेष रूप से प्रशिक्षित करने की तैयारी में है।
पीसीआरए अफसरों का कहना है कि निजी वाहन चालक बचत टिप्स का इस्तेमाल करने लगे हैं। लेकिन किसानों और व्यवसायिक वाहन चालकों के जागरूक नहीं होने के कारण डीजल की बचत नहीं हो पाती है। इसलिए अब उन्हें नुस्खे सिखाए जाएंगे।
देश के 7।5 करोड़ घरों में बिजली नहीं
बिजली की स्थित को लेकर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को सौंपी गई एक रिपोर्ट के अनुसार देश के 7।5 करोड़ घरों में बिजली नहीं है। जहां बिजली है, उन गांवों में प्रति व्यक्ति मासिक खपत आठ यूनिट है जबकि शहरों में मासिक प्रति व्यक्ति बिजली खपत 24 यूनिट है।
नवीन ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए काम करने वाले सांसदों के एक समूह ने यह रिपोर्ट सौंपी है। इसमें कहा गया है कि भारत में नवीन ऊर्जा क्षेत्र में काफी संभावना है लेकिन प्रति व्यक्ति ऊर्जा खपत के मामले में इसकी गिनती दुनिया के फिसड्डी देशों में की जाती है।
रिपोर्ट के मुताबिक बिजली की कम खपत का कारण इसकी कम मांग नहीं बल्कि इसकी कम उपलब्धता है।